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छत्तीसगढ़: कोविड से जान गंवाने वालों के परिजनों को चार लाख रुपये की मुआवजा राशि देने की मांग

By भाषा | Updated: November 24, 2021 23:52 IST

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रायपुर, 24 नवंबर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोरोना वायरस संक्रमण से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को चार लाख रुपए की मुआवजा राशि देने की मांग की है।

राज्य के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को यहां बताया कि मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि केंद्र सरकार कोरोना संक्रमण से मृत व्यक्तियों के परिवारों को मुआवजा के रूप में पूर्व घोषित चार लाख रुपए की राशि देने के लिए आवश्यक पहल करें।

अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी में बघेल ने लिखा है कि केन्द्र सरकार गृह मंत्रालय द्वारा 14 मार्च 2020 को जारी अपने पूर्व के आदेश को लागू करे, जिसमें सरकार ने संक्रमण से जान गंवाने वाले के परिजन को चार लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की थी।

मुख्यमंत्री ने चिट्ठी में यह भी अवगत कराया है कि केन्द्र सरकार ने बाद में इस अधिसूचना में संशोधन किया और मुआवजे की राशि को घटाकर 50 हजार रुपए कर दिया।

बघेल ने पत्र में कहा, ''हमें लगता है कि ऐसे संकट के समय में मृतक के परिवार को चार लाख रुपए की राशि प्रदान करना जरूरी है। हमारा ऐसा मानना है कि एसडीआरएफ मानदंडों के अनुसार मुआवजा राशि चार लाख रुपए में से 75 प्रतिशत जो कि तीन लाख होते हैं, केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाना है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राज्यों की जिम्मेदारी होगी। हम कुल चार लाख रूपए मुआवजे की राशि में से राज्य के हिस्से की राशि देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसमें हम आपके सहयोग की अपेक्षा करते हैं जिससे संकट की इस घड़ी में हम अपने नागरिकों के साथ खड़े हो सकें और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने में अपना योगदान दे सकें।''

मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि 11 सितम्बर 2021 को भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया कि वह एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष) के माध्यम से कोविड-19 महामारी से प्रभावित लोगों के परिवारों को मुआवजा राशि के रूप में 50 हजार रूपए का भुगतान करेगा। एनडीएमए (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) के तहत मुआवजे की राशि को केंद्र और राज्य द्वारा क्रमशः 75 प्रतिशत व 25 प्रतिशत के अनुपात में साझे रूप से वहन किया जाता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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