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केएमपी एक्सप्रेसवे पर चक्का जाम: प्रदर्शन के गाने, तिरंगा और यात्रियों से नम्र अनुरोध करते दिखे प्रदर्शनकारी

By भाषा | Updated: February 6, 2021 20:04 IST

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नयी दिल्ली, छह फरवरी तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए शनिवार को किसानों के तीन घंटे के राष्ट्रव्यापी ‘चक्का जाम’ के दौरान केएमपी एक्सप्रेसवे पर स्पीकरों पर बजते प्रदर्शन के देहाती गाने, ट्रकों और ट्रैक्टरों पर लगे तिरंगे और इंतजार में खड़े राहगीर नजर आए।

केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले किसान संगठनों ने आज दोपहर 12 बजे से लेकर अपराह्न तीन बजे तक ‘चक्का जाम’ का आह्वान किया था।

इस प्रदर्शन में पहुंचे एक स्थानीय किसान ने कहा, ‘‘ मैं 11 बजे यहां आया। तब महज कुछ लोग थे और कुछ ही देर में भीड़ बहुत बढ़ गई। उद्देश्य शांतिपूर्ण ढंग से वह काम करना है जो हमारे नेताओं ने हमें निर्देश दिया है- यानी तीन बजे तक सड़क जाम करनी है।’’

सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी किसानों को बिस्किट और फल वितरित किए गए। वाहन चालकों को नम्रतापूर्वक प्रदर्शन के बारे में बताया गया और उनसे लौट जाने का अनुरोध किया गया।

हरियाणा के हिसार निवासी अजीत अहलूवालिया (29) ने कहा, ‘‘ लोगों के लिए हम असुविधा पैदा नहीं करना चाहते।’’

अहलूवालिया ने कहा, ‘‘ इसी वजह से केवल तीन घंटे के लिए आह्वान दिया गया था। सुरक्षाबल हमारा और उनका रास्ता कई दिनों से रोक रहे हैं। हम आशा करते हैं कि आम लोग महज कुछ घंटे के लिए हमारे साथ सहयोग करें। सच्चाई यह है कि वे ऐसा कर रहे हैं।’’

बीमार लोगों को लेकर जा रहे वाहनों को बिना किसी देरी के जाने दिया गया।

उल्लेखनीय है कि 136 किलोमीटर लंबे कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे या पश्चिमी परिगामी एक्सप्रेसवे का 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन किया था। इसे दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों की संख्या घटाकर यहां व्यस्त सड़कों पर भीड़ कम करने के लिए बनाया गया है। इससे प्रदूषण में कमी लाने में भी मदद मिलती है। यह उत्तरी हरियाणा और दक्षिणी जिलों के बीच उच्च गति का संपर्क प्रदान करता है और इससे हरियाणा एवं पड़ोसी राज्यों के बीच खासकर वाणिज्यिक यातायात की रफ्तार बढ़ जाती है।

धैर्य के साथ इंतजार कर रहे यात्रियों ने कहा कि उन्हें ‘चक्का जाम’ की जानकारी थी लेकिन सामाजिक एवं पेशेवर कार्यक्रमों के चलते उन्हें निकलना पड़ा।

निजी ठेकेदार सतनाम संधू (42) को किसी व्यापारिक बैठक में जाना था जबकि सोनू आहूजा एवं उनके परिवार के लोग अपने एक रिश्तेदार की शादी में जा रहे थे।

आहूजा ने कहा, ‘‘ हमारा परिवार भी किसान है और हम किसानों के आंदोलन का पूरा समर्थन करते हैं। मैं प्रदर्शन के लिए कई बार सिंघू बार्डर जा चुका हूं। आज भी यदि मेरे रिश्तेदार की शादी नहीं होती तो आप मुझे यहां अपने किसान साथियों के साथ खड़ा पाते।’’

हजारों किसान केंद्र के नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए पिछले साल नवंबर से हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश से लगी दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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