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जम्मू-कश्मीर के लोगों के खिलाफ केंद्र के हमलों का मिलकर मुकाबला करना होगा : महबूबा मुफ्ती

By भाषा | Updated: April 4, 2021 16:55 IST

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(सुमीर कौल)

श्रीनगर/नयी दिल्ली, चार अप्रैल जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इन कयासों को खारिज कर दिया कि मुख्य धारा की छह पार्टियों का ‘ गुपकर गठबंधन’ (पीएजीडी) टूटने के कगार पर पहुंच गया था।

उन्होंने जोर देकर कहा कि एकजुट रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है क्योंकि केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर के लोगों पर किए जा रहे ‘हमलों’ का मिलकर ही मुकाबला करना होगा।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीपीडी) की अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती ने पीटीआई, भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘इस तरह के गठबंधन को जड़े जमाने में समय लगता है।’’

उनका मानना है कि हाल में गठबंधन में उठा ‘शुरुआती विवाद’ स्वाभाविक समस्या थी।

महबूबा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब एक घटक पीपुल्स कांफ्रेंस गुपकर गठबंधन से अलग हो गया है और स्वयं उनकी पार्टी के कुछ नेताओं ने सुझाव दिया है कि उन्हें पीडीपी के नेशनल कांफ्रेंस से संबंधों और गुपकर गठबंधन में बने रहने पर पुनर्विचार करना चहिए।

पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकर डेक्लेरेशन (पीएजीडी) या गुपकर गठबंधन का गठन पिछले साल अक्टूबर में जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव से पहले किया गया था और नेशनल कांफ्रेंस, पीपीडी, पीपुल्स कांफ्रेंस, माकपा, भाकपा, अवामी नेशनल कांफ्रेंस और जेकेपीएम इसके घटक थे।

महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘‘जहां तक गुपकर गठबंधन की बात है तो शुरुआती समस्याओं की उम्मीद थी। हम पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। इस तरह के गठबंधन में समय लगता है लेकिन केंद्र सरकार के जम्मू-कश्मीर के लोगों पर हमले को देखते हुए कोई अन्य विकल्प नहीं है कि हम एकजुट होकर एक इकाई के तौर पर आगे बढ़े।’’

पार्टी संस्थापक मुज्जफर हुसैन बेग सहित कुछ पीडीपी नेताओं के हाल में पार्टी छोड़ने के बारे में पूछे जाने पर 61 वर्षीय महबूबा ने माना कि यह ‘क्षति’ है।

उन्होंने साथ ही कहा, ‘‘ जम्मू-कश्मीर में सभी के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है और पीडीपी अलग नहीं है लेकिन मैं आश्वस्त हूं कि हम इन चुनौतियों को पार कर एवं अधिक मजबूत होकर उभरेंगे। ईंशाल्लाह।’’

पीडीपी नेता ने भाजपा के साथ खराब हुए रिश्ते के बारे में भी बात की जिसके साथ वर्ष 2015-18 तक राज्य में उनका गठबंधन था।

महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘‘यह मेरे उनके रिश्ते की बात नहीं है। कोई भी अपनी आवाज उनके दंडात्मक कृत्यों के खिलाफ उठाता है तो उस पर देशविरोधी होने का ठप्पा लगा दिया जाता है।’’

देश में चल रहे किसान आंदोलन और कुछ विद्यार्थियों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, राजनेताओं और अन्य की गिरफ्तारी की ओर इशारा करते हुए पीडीपी नेता ने कहा, ‘‘ हर किसी को उनके (भाजपा) जनविरोधी कदमों के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत चुकानी पड़ रही है। अब देश भारत के संविधान से नहीं चल रहा बल्कि उनकी (केंद्र) मनमर्जी से चल रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘वे भारी बहुमत का इस्तेमाल संविधान और संसद को जनविरोधी कानूनों से ध्वस्त करने में कर रहे हैं। इसलिए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने की असंवैधानिक कार्रवाई के खिलाफ मेरी मुखर आवाज, जिसकी गांरटी संविधान निर्माण के पहले दिन से ही दी गई थी, ने मुझे देशविरोधी बना दिया है और इसलिए यह भारत की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न करता है।’’

अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने से पहले ही महबूबा को हिरासत में ले लिया गया था।

उन्होंने मुख्यमंत्री रहने के दौरान मुख्यमंत्री कोष के कथित दुरुपयोग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा हाल में हुई पूछताछ पर भी अपनी बात रखी।

महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘‘इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। वर्ष 2018 से ही यह सरकार मुझे वित्तीय गड़बड़ी या आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसाने की कोशिश कर रही है। मुझ पर सबसे अपमानजनक आरोप लगाए जा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरी छवि खराब करने की कोशिश है और मीडिया के एक धड़े के माध्यम से झूठ फैलाया जा रहा है जो इस शासन में उनका ‘मुखपत्र’ बन गया है।

पुलिस की नकारात्मक रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट जारी करने से इनकार पर महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘‘नकारात्मक रिपोर्ट मेरी मां के खिलाफ भी दी गई जो करीब सत्तर साल की हैं । सरकार के मुताबिक उनका पासपोर्ट भारत की सुरक्षा के लिए हानिकारक हो सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह स्तब्ध करने वाला लग सकता है लेकिन इस शासन से इसी की उम्मीद थी जिसने पार्किंसन से ग्रस्त 85 साल के सामाजिक कार्यकर्ता (स्टैन स्वामी) को जेल में डाला हुआ है और महीनों तक उन्हें स्ट्रा और सिपर नहीं दिया गया।’’

महबूबा मुफ्ती ने कहा, ‘‘इस सरकार के पास न केवल दूर दृष्टि की कमी है बल्कि सहानुभूति की भी। उसने सनक में गलत एवं गैर कानूनी तरीके से पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को लेकर जो कदम उठाया, यह बदले की कार्रवाई उसी का नतीजा है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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