जामिया हिंसा पर केंद्र ने कोर्ट से कहा, जांच अहम चरण में, 29 अप्रैल तक का समय दिया

By भाषा | Updated: February 4, 2020 16:37 IST2020-02-04T16:37:27+5:302020-02-04T16:37:27+5:30

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जांच के संबंध में रिपोर्ट दायर करने के लिए और समय मांगते हुए यह दलील मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ के समक्ष रखी। दलील पर गौर करते हुए पीठ ने केंद्र को जवाब दायर करने के लिए 29 अप्रैल तक का समय दिया।

Center told the court on Jamia violence, investigation in critical phase, till April 29 | जामिया हिंसा पर केंद्र ने कोर्ट से कहा, जांच अहम चरण में, 29 अप्रैल तक का समय दिया

याचिकाओं में दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने जैसी अन्य कार्रवाई की मांग की गई है।

Highlightsअब तक एजेंसी के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। सरकार को जवाब दायर करने के लिए 29 अप्रैल तक का समय दिया।

केन्द्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को मंगलवार को बताया कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई हिंसा की घटना में जांच अहम चरण में है।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जांच के संबंध में रिपोर्ट दायर करने के लिए और समय मांगते हुए यह दलील मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ के समक्ष रखी। दलील पर गौर करते हुए पीठ ने केंद्र को जवाब दायर करने के लिए 29 अप्रैल तक का समय दिया।

सुनवाई के दौरान, जामिया के कुछ छात्रों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्जाल्विस ने कहा कि 93 छात्रों एवं शिक्षकों ने उनके ऊपर हुए कथित हमलों की पुलिस में शिकायत दायर कराई है लेकिन अब तक एजेंसी के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

याचिकाकर्ताओं के अन्य वकीलों ने आरोप लगाया कि सरकार ने 19 दिसंबर को हुई अंतिम सुनवाई के वक्त चार हफ्ते के भीतर जवाब दायर करने के लिए दिए गए अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया है। हालांकि पीठ ने अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार किया और सरकार को जवाब दायर करने के लिए 29 अप्रैल तक का समय दिया।

उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर को केंद्र, आप सरकार और पुलिस से सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान जामिया में हुई हिंसा को देखने के लिए न्यायिक आयोग के गठन की विभिन्न जनहित याचिकाओं पर जवाब मांगा था।

अदालत वकीलों, जामिया के छात्रों, ओखला के निवासियों, जामा मस्जिद के इमाम की ओर से दायर छह याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें छात्रों के इलाज और मुआवजे की भी मांग की गई है। इसके अलावा, याचिकाओं में दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने जैसी अन्य कार्रवाई की मांग की गई है।

वकील रिजवान द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि एम्स में भर्ती कराए गए घायल छात्रों की मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, उनमें से एक की जान लगभग जा चुकी थी और अन्य की आंख की रोशनी चली गई। याचिका में आरोप लगाया है कि घायल छात्रों को दिया गया इलाज “अपर्याप्त” था, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक किया गया। याचिकाओं में कहा गया कि पुलिस ने बर्बरता से बल का प्रयोग किया और ‘‘छात्रों की अनुचित गिरफ्तारी पर चिंता जाहिर की गई है।’’ 

Web Title: Center told the court on Jamia violence, investigation in critical phase, till April 29

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