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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा-ऋणदाता पांच नवंबर तक कर्जदारों के खातों में ‘ब्याज पर ब्याज’ की रकम जमा करेंगे, जानिए पूरा मामला

By भाषा | Updated: October 27, 2020 17:29 IST

सरकार ने शीर्ष अदालत में दाखिल एक हलफनामे में कहा है कि मंत्रालय ने एक योजना जारी की है जिसके अनुसार ऋण देने वाली वित्तीय संस्थायें कोविड-19 के कारण छह महीने की ऋण स्थगन की अवधि के दौरान की यह राशि कर्जदारों के खातों में जमा करेंगी।

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ठळक मुद्देवित्त मंत्रालय ने कहा है कि कर्जदारों के खातों में यह रकम जमा करने के बाद ऋणदाता केन्द्र सरकार से इस राशि के भुगतान का दावा करेंगे।चक्रवृद्धि ब्याज और सामान्य ब्याज के अंतर की रकम ऋणदाता पांच नवंबर तक उनके खातों में जमा कर देंगे।एक मार्च, 2020 से 31 अगस्त 2020 के बीच की अवधि के लिये सभी पात्र कजदारों के खातों में चक्रवृद्धि और सामान्य ब्याज के अंतर की रकम जमा करेंगे।

नई दिल्लीः केन्द्र ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि रिजर्व बैंक की ऋण स्थगन योजना के दौरान दो करोड़ रुपए तक के कर्जदारों से लिये गये चक्रवृद्धि ब्याज और सामान्य ब्याज के अंतर की रकम ऋणदाता पांच नवंबर तक उनके खातों में जमा कर देंगे।

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि कर्जदारों के खातों में यह रकम जमा करने के बाद ऋणदाता केन्द्र सरकार से इस राशि के भुगतान का दावा करेंगे। सरकार ने शीर्ष अदालत में दाखिल एक हलफनामे में कहा है कि मंत्रालय ने एक योजना जारी की है जिसके अनुसार ऋण देने वाली वित्तीय संस्थायें कोविड-19 के कारण छह महीने की ऋण स्थगन की अवधि के दौरान की यह राशि कर्जदारों के खातों में जमा करेंगी।

हलफनामे में कहा गया है कि इस योजना के तहत सभी कर्ज देने वाली संस्थायें एक मार्च, 2020 से 31 अगस्त 2020 के बीच की अवधि के लिये सभी पात्र कजदारों के खातों में चक्रवृद्धि और सामान्य ब्याज के अंतर की रकम जमा करेंगे। हलफनामे के मुताबिक, केन्द्र सरकार ने निर्देश दिया है कि, योजना के उपबंध 3 में वर्णित कर्ज देने वाली सभी संस्थाएं इसे लागू करें और योजना के अनुसार सभी संबंधित कर्जदारों के लिये गणना की गयी राशि उनके खातों में जमा करें।

केन्द्र ने ऋण स्थगन की अवधि के दौरान कर्ज की राशि पर चक्रवृद्धि ब्याज वसूले जाने सहित रिजर्व बैंक के 27 मार्च और 23 मई 2020 के परिपत्रों से संबंधित अनेक मुद्दों को लेकर दायर की गयी याचिकाओं में यह हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में कहा गया है कि बहुत सावधानी से विचार के बाद पूरी वित्तीय स्थिति, कर्जदारों की स्थिति, अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव और ऐसे ही दूसरे पहलुओं को ध्यान में रखते हुये यह निर्णय लिया गया है।

न्यायालय ने 14 अक्टूबर को केन्द्र से कहा था कि रिजर्व बैंक की ऋण स्थगन योजना के तहत दो करोड़ रुपये तक के कर्जदारों के लिये ब्याज माफी पर उसे जल्द से जल्द अमल करना चाहिए क्योंकि आम आदमी की दिवाली उसके ही हाथ में है। शीर्ष अदालत ने पिछली सुनवाई पर केन्द्र से जानना चाहा कि क्या ऋण स्थगन की अवधि के दौरान कर्जदारों के दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज माफी का लाभ आम आदमी तक पहुंचेगा। न्यायालय ने कहा था कि उसकी चिंता इस बात को लेकर है कि ब्याज माफी का लाभ कर्जदारों को कैसे दिया जायेगा।

न्यायालय ने कहा था कि केन्द्र ने आम आदमी की स्थिति को ध्यान में रखते हुये ‘स्वागत योग्य निर्णय’ लिया है, लेकिन इस संबंध में प्राधिकारियों ने अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया है। इससे पहले, केंद्र सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि छह महीने के लिये ऋण की किस्त स्थगन सुविधा लेने वाले दो करोड़ रुपये तक के कर्जदारों के चक्रवृद्धि ब्याज को माफ करने का फैसला किया गया है।

रिजर्व बैंक ने भी 10 अक्टूबर को न्यायालय में दायर हलफनामे में कहा था कि छह महीने की अवधि से आगे किस्त स्थगन को बढ़ाने से ‘‘समग्र ऋण अनुशासन के खत्म होने’’ की स्थिति बन सकती है और इस वजह से अर्थव्यवस्था में ऋण निर्माण की प्रक्रिया पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

टॅग्स :सुप्रीम कोर्टभारत सरकारनरेंद्र मोदीइकॉनोमीभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई)
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