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किसानों को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है केंद्र: सुखबीर बादल

By भाषा | Updated: December 21, 2020 22:46 IST

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चमकौर साहिब (पंजाब), 21 दिसम्बर शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने सोमवार को केंद्र पर आरोप लगाया कि वह किसानों को ‘‘बदनाम’’ करने के प्रयास के तहत ‘‘बातचीत का छलावा’ कर रहा है ताकि यह धारणा बनायी जा सके कि वह उचित है और किसान गलत हैं।

बादल ने शहीदी जोर मेले के अवसर पर गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कहा, ‘‘केंद्र वार्ता की शुरूआत शुरू करके किसानों को दबाव में लाने का प्रयास कर रहा है। यह एक निरर्थक कवायद है जब किसान संगठन पहले ही तीन कृषि कानूनों को खारिज कर चुके हैं और उन्हें निरस्त करना चाहते हैं।’’

शिअद प्रमुख बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आपातकालीन संसद सत्र बुलाना चाहिए और इन कानूनों को वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला लोगों का होता है।

बादल ने कहा, ‘‘लोगों ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया है और लोगों की आवाज सुनना उनका कर्तव्य है।’’

बादल की पार्टी पहले कृषि कानूनों को लेकर राजग से अलग हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि ऐसा करने के बजाय, केंद्र ने पहले ‘‘आंदोलन को धर्म और अलगाववादियों से जोड़ा और अब भाई को भाई खिलाफ खड़ा कर रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने हमेशा किसानों और दलितों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी है। हम किसान आंदोलन में सहायता भी कर रहे हैं, लेकिन हमें इस बात की पीड़ा है कि केंद्र सरकार को किसानों की पीड़ा से कोई फर्क नहीं है।’’

उन्होंने केंद्र पर आढ़तियों को निशाना बनाने के लिए आयकर विभाग का ‘‘दुरुपयोग’’ करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं केंद्र को चेतावनी देता हूं कि वह जारी आंदोलन को जितना दबाने की कोशिश करेगा, वह उतना ही मजबूत होगा।’’

बाद में, चंडीगढ़ में शिरोमणि अकादली दल की कोर कमेटी की बैठक के बाद बादल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीनों कानूनों को निरस्त करने के लिए संसद का विशेष सत्र आहूत करने से ‘‘परहेज’’ नहीं करना चाहिए।

बैठक में, यह निर्णय लिया गया कि पार्टी की उप-समिति आने वाले दिनों में समान विचारधारा वाले दलों से मिलकर केंद्र को तीन कानूनों को रद्द करने के लिए मजबूर करेगी। इस उप समिति में पार्टी के वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भुंदुर, प्रेम सिंह चंदूमाजरा और सिकंदर सिंह मलूका शामिल हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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