लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 एमपी?, मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस?
By सतीश कुमार सिंह | Updated: March 13, 2026 15:07 IST2026-03-13T15:06:00+5:302026-03-13T15:07:31+5:30
विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को ‘‘पक्षपात और भेदभाव करने’’ सहित अन्य आरोपों को लेकर पद से हटाने का प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस बुधवार को संसद के दोनों सदनों में सौंप दिए।

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नई दिल्लीः विपक्षी सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने हेतु नोटिस प्रस्तुत किए हैं। 193 विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिनमें 130 लोकसभा सांसद और 63 राज्यसभा सांसद शामिल हैं, जिन्होंने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। लोकसभा सचिवालय को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से भी सीईसी के खिलाफ प्रस्ताव संबंधी नोटिस प्राप्त हुआ है। नोटिस की जांच प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू होने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि हस्ताक्षरकर्ताओं में अखिल भारतीय गठबंधन के दलों के सांसद शामिल हैं।
आम आदमी पार्टी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, हालांकि वह औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। कुछ निर्दलीय सांसदों ने भी नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि कई अन्य ने भी इस पहल में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है। यह पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस प्रस्तुत किया गया है।
कांग्रेस ने सरकार से कहा है कि वह महिला आरक्षण अधिनियम में किसी भी संशोधन को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाकर चर्चा करे। सूत्रों ने बताया कि इस बारे में सरकार को अवगत कराया गया है। केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रतन यू केलकर ने शुक्रवार को कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव की सावधानीपूर्वक योजना बनाई जाएगी और उसे क्रियान्वित किया जाएगा।
ताकि 85 प्रतिशत से अधिक का रिकॉर्ड मतदान सुनिश्चित हो सके तथा मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सके। जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का उद्घाटन करने के बाद केलकर ने तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से कहा कि निर्वाचन आयोग (ईसी) का प्राथमिक उद्देश्य 1987 के विधानसभा चुनाव के ऐतिहासिक 80.5 प्रतिशत मतदान के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना है।
किसानों के दावों का समय पर भुगतान करने की व्यवस्था करे सरकार : राजीव शुक्ला
राज्यसभा में शुक्रवार को कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने कृषि बीमा योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को संकट के समय समुचित राहत नहीं मिलने का दावा करते हुए कहा कि किसानों के दावों का समय पर और उचित भुगतान करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए शुक्ला ने कहा कि कृषि बीमा योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बड़े जोश से योजना शुरू की गई थी और कहा गया था कि किसानों को कम प्रीमियम पर संकट में बड़ी मदद मिलेगी। ‘‘लेकिन आज किसानों को जरूरत के समय इन योजनाओं से कुछ नहीं मिल पा रहा है।’’