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पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम सिंह को उम्रकैद की सजा, मरने तक रहना होगा जेल में

By स्वाति सिंह | Updated: January 17, 2019 18:24 IST

विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने हत्या मामले में 11 जनवरी को गुरमीत और तीन अन्य - कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह ओर कृष्ण लाल को दोषी ठहराया था।

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पंचकुला में एक विशेष अदालत गुरुवार को पत्रकार हत्या मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और अन्य तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम सिंह पर 50 हजार का जुर्माना लगाया है। कोर्ट के फैसले के मुताबिक आज से 20 साल से बाद राम रहीम सिंह की उम्रकैद की सजा शुरू होगी। यानी 70 साल की उम्र में राम रहीम सिंह की उम्रकैद की सजा शुरू होगी।यानी मोटे तौर पर देखा जाए तो मरने तक राम रहिम को जेल में ही रहना होगा।  

सजा सुनाए जाने के मद्देनजर हरियाणा में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पंचकूला की एक विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सजा सुनाया। अधिकारियों ने बताया कि पंचकूला, सिरसा और हरियाणा के अन्य हिस्सों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सिरसा में डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय है। 

पंचकूला अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हरियाणा पुलिस ने अदालत जाने वाले मार्गों पर अवरोधक लगा दिए हैं।

अदालत ने पत्रकार की हत्या के मामले में सजा सुनाए जाते समय राम रहीम और तीन अन्य की वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पेशी संबंधी हरियाणा सरकार की याचिका बुधवार को स्वीकार कर ली थी। 

राज्य सरकार ने मंगलवार को एक याचिका दायर कर कहा था कि डेरा प्रमुख की आवाजाही के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है। 

51 वर्षीय राम रहीम अपनी दो अनुयायियों के बलात्कार के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल कारावास की सजा काट रहा है।

तीन अन्य दोषी कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल अम्बाला जेल में बंद हैं।

2002 के पत्रकार हत्या मामले में विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने 11 जनवरी को राम रहीम और तीन अन्य को दोषी ठहराया था। 

राम रहीम और तीन अन्य को जब दोषी ठहराया गया था तब भी वे वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पेश हुए थे। चारों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया जा चुका है। निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को शस्त्र कानून के तहत भी दोषी ठहराया गया है। 

धारा 302 के तहत न्यूनतम सजा आजीवन कारावास और अधिकतम सजा मृत्युदंड है।

मारे गए पत्रकार के परिवार ने दोषियों को मृत्युदंड दिए जाने की मांग की है।

छत्रपति के समाचार पत्र ‘पूरा सच’ ने एक पत्र प्रकाशित किया था जिसमें यह बताया गया था कि डेरा मुख्यालय में राम रहीम किस प्रकार महिलाओं का यौन उत्पीड़न कर रहा है। इसके बाद छत्रपति को अक्टूबर 2002 में गोली मार दी गई थी।

गंभीर रूप से घायल होने के कारण पत्रकार की बाद में मौत हो गई थी और 2003 में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले को बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया था जिसने जुलाई 2007 में आरोप पत्र दायर किया था।  

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