शादी के दौरान गाड़ी खींची और सोफा लूटा गया?, बिहार विधानसभा में भाजपा विधायक ने उठाया पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी की शादी का मुद्दा
By एस पी सिन्हा | Updated: February 20, 2026 19:37 IST2026-02-20T19:35:11+5:302026-02-20T19:37:01+5:30
मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि अगर मिथिलेश तिवारी गलत बोल रहे हैं तो राजद के विधायक शपथ लेकर कह सकते हैं कि वे गलत हैं।

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पटनाः बिहार विधानसभा में कार्यवाही के दौरान शुक्रवार को माहौल उस समय गर्मा गया जब भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने बिना नाम लिए एक पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी की शादी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री की बेटी की शादी में बिहार कलंकित हुआ और आरोप लगाया कि शादी के दौरान गाड़ी खींची गई और सोफा लूटा गया। इस बयान पर राजद विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। राजद के एक विधायक ने पलटवार करते हुए कहा कि “आपने देश जलाया है, ये गलत बोल रहे हैं।” इसके बाद सदन में तीखी बहस शुरू हो गई।
मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि अगर मिथिलेश तिवारी गलत बोल रहे हैं तो राजद के विधायक शपथ लेकर कह सकते हैं कि वे गलत हैं। इस पर राजद के आलोक मेहता ने जवाब दिया कि क्या वे शपथ लेकर कह सकते हैं कि वे सही बोल रहे हैं। इस दौरान राजद विधायक करिश्मा राय ने भी मिथिलेश तिवारी के भाषण का विरोध किया।
जवाब में मिथिलेश तिवारी ने कहा कि ये बहन चम्पा विश्वास का नाम नहीं सुनी हैं, इसलिए ऐसा बोल रही हैं।” उनके इस बयान पर भी सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। मिथिलेश तिवारी ने आगे कहा कि हमारे गृह मंत्री का नाम सुनते ही विपक्ष के लोग कांप जाते हैं कि बुलडोजर आ जाएगा, जबकि गृह मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह सरकार का बुलडोजर है।
इसी क्रम में मिथिलेश तिवारी ने सदन के माध्यम से अपनी ही सरकार से बिहार में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था जरूरी है सदन में इस मुद्दे को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिससे कार्यवाही कुछ देर के लिए बाधित भी हुई।
बिहार विधानसभा में गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने राजद पर बोला तीखा हमला
बिहार विधानसभा में गृह विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष के द्वारा बिहार में कानून-व्यवस्था की सवाल उठाए जाने पर जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को सरकार की ओर से जवाब देते हुए राजद पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजद रोजाना अपना पहला ट्वीट अपराध को लेकर करती है,
लेकिन इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि गृह विभाग के बजट पर राजद की ओर से कोई कटौती प्रस्ताव तक नहीं दिया गया। सम्राट द्वारा राजद को निशाना पर लेने के बाद विपक्ष के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। सम्राट चौधरी ने कहा कि आपातकालीन सेवा 112 के माध्यम से लाखों लोगों को त्वरित सहायता मिल रही है।
उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा से जुड़े साढ़े चार लाख मामले सामने आए हैं, जिन पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए। दायित्व भले बदला हो, लेकिन आज भी अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ही होता है।
गृह मंत्री ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि हत्या और डकैती के मामलों में करीब सात हजार, लूट के ढाई हजार और पुलिस पर हमले के मामलों में 2700 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने दावा किया कि बिहार में कोई भी अपराधी बचकर नहीं निकल सकता। वर्ष 2025 में अब तक 3.86 लाख से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की गई है।
राजद पर हमला जारी रखते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में सुशासन नहीं था और इसी कारण 1994 में नीतीश कुमार उनसे अलग हुए, क्योंकि सत्ता के जरिए सुशासन स्थापित नहीं हो पा रहा था। उन्होंने कहा कि पुलिस को पूरी छूट दी गई है ताकि सुशासन लागू किया जा सके।
वहीं, सांसद पप्पू यादव पर तंज कसते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि “हाथी भी बीमार होकर अस्पताल जाना चाहता है।” उन्होंने याद दिलाया कि पप्पू यादव ने कभी कहा था कि बिहार पुलिस “चींटी भी नहीं मार सकती”, जबकि आज वही व्यक्ति अस्पताल जाने की बात कर रहा है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई यह कहता है कि किसी नेता का बेटा अपराध में शामिल है, तो नाम बताइए, 24 घंटे के भीतर उसे जेल भेजा जाएगा। सम्राट चौधरी ने बताया कि सात निश्चय पार्ट-3 के तहत उद्योग स्थापित करने की व्यवस्था करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया है।
साथ ही अब प्रमंडल से लेकर जिला स्तर तक एसटीएफ की तैनाती की जाएगी, ताकि अपराध पर और प्रभावी नियंत्रण हो सके। सम्राट चौधरी ने सदन में घोषणा की कि बिहार में उद्योगों को बेहतर सुरक्षा देने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की तर्ज पर बीआईएसएफ नाम की दो नई बटालियन गठित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि राज्य में पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए कई नए प्रयोग किए जा रहे हैं। सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार में कुख्यात अपराधियों के लिए अलग तरह की हाई-सिक्योरिटी जेल बनाई जाएगी, जिसे उन्होंने ‘कालापानी’ की संज्ञा दी। यह जेल पहाड़ी इलाके में बनाई जाएगी, जहां सिर्फ एक ही रास्ता होगा।
यहां रखे गए कैदी पूरी तरह बाहरी दुनिया से कटे रहेंगे। उन्होंने कहा कि इससे मौजूदा जेलों से संचालित होने वाली समानांतर आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी। अपराध के आंकड़े पेश करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में बिहार देश में सबसे निचले पायदान पर है, यानी यहां ऐसे मामलों की संख्या सबसे कम है।
डकैती के मामलों में बिहार 31वें स्थान पर है, महिलाओं पर हमले के मामलों में 35वें, यौन उत्पीड़न के मामलों में भी 35वें स्थान पर है। बलात्कार के मामलों में अपराध दर के लिहाज से बिहार 35वें स्थान पर है, जबकि हत्या के मामलों में राज्य 11वें स्थान पर है।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने दिया ब्राह्मण शब्द को प्रोसीडिंग से हटाने का आदेश
बिहार विधानसभा में शुक्रवार को यूजीसी(इक्विटी एक्ट) को लागू करने की मांग के दौरान भाकपा- माले विधायक संदीप सौरभ ने ब्राह्मणवाद शब्द बोलकर सदन में हंगामा खड़ा कर दिया। उनकी इस टिप्पणी पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने तुरंत संज्ञान लिया और ब्राह्मण शब्द को प्रोसीडिंग से हटाने का आदेश दिया।
इसी बीच सदन में सत्ता और विपक्ष के सदस्यों ने भारी हंगामा किया। दरअसल, उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव के मुद्दे पर संदीप सौरभ ने विधानसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत बिहार सरकार से यूजीसी इक्विटी एक्ट को लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संथानों में जातिवाद-भेदभाव को ख़त्म करने के लिए इस नियम को लागू करना जरूरी है।
संदीप सौरभ ने कहा की ब्राह्मणवाद मानसिकता के लोग इसे लागू नहीं करने देना चाहते हैं। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ब्राह्मण शब्द को प्रोसीडिंग से हटाई जाये। हालांकि, सदन में “ब्राह्मणवाद” पर की गई टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष के विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई और बयान को समाज को बांटने वाला बताया।
इस पर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी समाज के खिलाफ इस तरह की भाषा उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु पूरे समाज के लिए क्षति होती है और समाज में नफरत फैलाने से देश कमजोर होता है।
उन्होंने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे भी तकनीकी शिक्षा के दौरान रैगिंग और कठिन परिस्थितियों से गुजरे हैं। विजय सिन्हा ने कहा कि मैं भी मुजफ्फरपुर के टेक्निकल कॉलेज में पढ़ने गया था। भूमिहार ब्राह्मण हूं, इसके बाद भी मेरा रैगिंग हुआ। मुझे हॉस्टल से बाहर निकाला गया।
विजय सिन्हा ने कहा कि संवैधानिक पद बैठे लोग संवैधानिक संस्था के निर्णय पर प्रश्न उठा रहे हैं। हम हर समाज का सम्मान करते हैं। वहीं ये लोग बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की भावना को तार तार कर रहे हैं। इसके बाद संदीप सौरव ने सदन में आरोप लगाया कि देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि इसी वजह से बिहार में यूजीसी के नए नियम लागू किए जाने चाहिए, ताकि संस्थानों में समानता सुनिश्चित हो सके। संदीप सौरभ ने दावा किया कि 2019 से 2024 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत विवादों में 118 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
साथ ही उन्होंने छात्रों की मौतों का मुद्दा उठाते हुए रोहित वेमुला का जिक्र किया और सवाल किया कि ऐसी घटनाएं कब तक होती रहेंगी। जबकि भाजपा विधायक मिथलेश तिवारी ने कहा कि विपक्ष में बैठे लोगों को ब्राह्मणों से तकलीफ है। इन्हें ब्राह्मणवाद समझ में नहीं आती है। तीनों लोकों के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण ने गरीब ब्राह्मण सुदामा के पैर पखाड़े थे।