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बिना डेटा देखे कोविशील्ड लगाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता:न्यायालय

By भाषा | Updated: October 29, 2021 18:28 IST

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नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोवैक्सीन की पूरी खुराक ले चुके लोगों को कोविड-19 महामारी के दौरान विदेश यात्रा में सक्षम बनाने के लिए कोविशील्ड की खुराक लगाने का केंद्र को निर्देश देकर वह लोगों की जान से नहीं खिलवाड़ नहीं कर सकता।

शीर्ष न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कहा, जिसमें कहा गया है कि कोवैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मंजूरी नहीं मिली है और लोग विदेश यात्रा की अनुमति पाने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्न की पीठ ने कहा कि अदालत के पास इस बारे में ऐसा कोई आंकड़ा (डेटा) नहीं है कि लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा और वह केंद्र को निर्देश नहीं दे सकती कि वह लोगों को (कोवैक्सीन की पूरी खुराक के बाद अब) कोविशील्ड का टीका लगाये।

पीठ ने कहा, ‘‘हम दोबारा टीका लगाने का केंद्र को निर्देश देकर लोगों की जान से खिलवाड़ नहीं कर सकते। हमारे पास कोई डेटा नहीं है। हमने अखबारों में पढ़ा है कि भारत बायोटेक ने मंजूरी के लिए डब्ल्यूएचओ के पास एक अर्जी दी है। हमें उसके जवाब की प्रतीक्षा करनी चाहिए। हम इस विषय पर दिवाली की छुट्टी के बाद विचार करेंगे।’’

अधिवक्ता कार्तिक सेठ ने दलील दी कि प्रतिदिन कुछ छात्र और लोग विदेश जाने को इच्छुक होते हैं लेकिन डब्ल्यूएचओ से कोवैक्सीन को मंजूरी प्राप्त नहीं होने के चलते उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती।

उन्होंने कहा कि मौजूदा व्ववस्था में कोवैक्सीन टीका लगवा चुका व्यक्ति कोविशील्ड लगवाने के लिए कोविन पोर्टल पर अपना पंजीकरण नहीं करा सकता और इस सिलसिले में केंद्र को निर्देश दिया जा सकता है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम बगैर किसी डेटा के दूसरा टीका लगाने का निर्देश नहीं दे सकते। हम आपकी चिंता समझ रहे हैं लेकिन डब्ल्यूएचओ के जवाब का इंतजार करें।’’

न्यायालय ने कहा कि यह भी हो सकता है कि जनहित याचिका की आड़ में (कोवैक्सीन के) प्रतिस्पर्धी वाद का फायदा उठा लें।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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