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आंधी के बीच जलता दिया : एम सांगवी की आंखों में पल रहा डॉक्टर बनने का सपना

By भाषा | Updated: November 7, 2021 13:15 IST

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नयी दिल्ली, सात नवंबर तमिलनाडु राज्य के एक गांव में देश की आजादी के 75वें साल में 12वीं कक्षा और फिर राष्ट्रीय प्रवेश पात्रता परीक्षा (एनईईटी) पास करने वाली पहली छात्रा बनने का गौरव हासिल करने वाली एम सांगवी आज न सिर्फ अपने गांव बल्कि पूरे इलाके के लिये ‘आदर्श’ है।

तमिलनाडु के नानजप्पनुर गांव में 20 वर्ष की एम सांगवी से पहले किसी ने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी नहीं की थी। अनुसूचित जनजाति से संबद्ध सांगवी न केवल यहां से 12वीं कक्षा पास करने वाली पहली छात्रा बनी बल्कि वह नीट 2021 में बाजी मार कर, आदिवासी मालासर समुदाय में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली लड़की भी है।

अपनी अनूठी संस्कृति के लिए अलग पहचान रखने वाले मालासर समुदाय में लड़की के यौवन की दहलीज़ पर कदम रखने पर जश्न मनाए जाने की परंपरा है। लेकिन सांगवी की आंखों में पले और आकार ले रहे सपने ने उसके समुदाय को लंबे समय तक जश्न मनाने का अवसर दे दिया। वह डॉक्टर बनना चाहती है और विषम परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के उसके हौसले ने यह संकेत दे दिया है कि वह अपना नाम ‘‘डॉक्टर एम सांगवी’’ जरूर लिखेगी।

करीब 40 परिवारों के नानजप्पनुर गांव में एक परिवार सांगवी का है जिसमें एक बरस पहले तक वह अपनी कच्ची झोपड़ी में मां वसंतमणि और पिता मुनियप्पन के साथ रहती थी। खेत में काम कर गुजर-बसर करने वाले इस दंपत्ति ने मुश्किलों के बाद भी बिटिया की पढ़ाई पर आंच नहीं आने दी। उसने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई और मुनियप्पन ने उसे प्रोत्साहित किया। 2018 में बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सांगवी ने पिचानूर के सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 2017-18 में नीट की परीक्षा दी लेकिन पहले प्रयास में वह नाकाम रही। इसके अगले साल वह नीट की परीक्षा नहीं दे पाई क्योंकि मुनियप्पन बीमार हो गए और उन्होंने आखिरी सांस ले ली। वहीं आंखों की समस्या से पीड़ित वसंतमणि को सर्जरी के बाद और कम दिखने लगा।

कोविड महामारी का कहर चरम पर था और नानजप्पनुर में राहत कार्यों में लगे कुछ लोगों ने आदिवासी बहुल नानजप्पनुर गांव में राहत सामग्री पहुंचाई। इस दौरान उन्हें पढ़ाई के लिए सांगवी की ललक के बारे में पता चला। उन्होंने सांगवी की मदद की। स्टेट बोर्ड और गैर सरकारी संगठन की सहायता से सांगवी ने किताबें लीं और नीट परीक्षा 2021 के दूसरे प्रयास में 720 में से 202 अंक हासिल किये। इससे पहले, उसे इस परीक्षा के लिए सामुदायिक प्रमाण पत्र हासिल करने में बहुत मुश्किल हुई थी। लेकिन कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद उसे यह प्रमाण पत्र मिला।

गांव के लोगों को बीमारी से जूझते देखने वाली सांगवी डॉक्टर बन कर उनके लिए कुछ करना चाहती है। इसके लिए वह सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक सीट और तमिलनाडु सरकार से आर्थिक मदद की आकांक्षी है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ प्रतिशत 108 और 137 अंकों के बीच है और सांगवी ने 202 अंक हासिल किए हैं। रास्ता लंबा और मुश्किलों भरा है लेकिन सांगवी को विश्वास है कि वह चुनौतियों से पार पा लेगी और डॉक्टर बन कर अपने गांव के लोगों का इलाज करेगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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