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तमिलनाडु में सप्ताहांत पर मंदिर खोलने की मांग को लेकर भाजपा ने किया विरोध प्रदर्शन

By भाषा | Updated: October 7, 2021 19:39 IST

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चेन्नई, सात अक्टूबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई ने सप्ताहांत पर मंदिर खोलने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को राज्य भर में विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी द्रमुक ने आश्वासन दिया कि महामारी का खतरा कम होने पर मुख्यमंत्री एम के स्टालिन सप्ताहभर मंदिरों को खोलने के वास्ते कम उठाएंगे।

त्यौहारी मौसम में कोविड महामारी को फैलने से रोकने के लिए फिलहाल मंदिर दर्शन के लिए सप्ताह के चार दिन खुले हैं और तीन दिन बंद हैं।

राज्य के हिंदू धार्मिक एवं परमार्थ अनुदान मंत्री पी के शेखर बाबू ने यहां संवाददाताओं से कहा, “केंद्र सरकार के परामर्श पर यह निर्णय लिया गया है। श्रद्धालुओं को शुक्रवार, शनिवार और रविवार को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। हालांकि, इन दिनों पुजारी नियमित पूजा-अर्चना कर रहे हैं।” वह सप्ताहांत को मंदिर खोलने की भाजपा की मांग के बारे में पूछे गये एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

भाजपा के विरोध प्रदर्शन पर तंज कसते हुए मंत्री ने कहा कि बृहस्पतिवार को विरोध प्रदर्शन कर पार्टी ने दर्शन के दिन में एक दिन की कटौती कर दी। उन्होंने कहा, “सैकड़ों श्रद्धालु बृहस्पतिवार को कालीकंबल मंदिर में दर्शन करते हैं। लेकिन मंदिर के सामने विरोध प्रदर्शन के चलते वे दर्शन नहीं कर पाए।”

बाबू ने भाजपा पर इस मुद्दे पर सरकार का अंध-विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “उन्हें समझना चाहिए कि लोगों की जान बचाने के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं। उन्हें मुद्दे की गंभीरता को समझना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि एक बार महामारी का खतरा कम हो जाए उसके बाद, मुख्यमंत्री स्टालिन यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएंगे कि सप्ताह में हर दिन मंदिर खुले रहें।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार सप्ताहांत पर मंदिरों में पूजा-अर्चना पर प्रतिबंध हटाए और चेतावनी दी कि यदि द्रमुक सरकार ने अपनी “विचारधारा थोपने की कोशिश” की तो उसे लोगों का रोष झेलना पड़ेगा। अन्नामलाई ने कहा कि सप्ताहांत पर मंदिर में दर्शन करने पर प्रतिबंध लगाकर राज्य सरकार श्रद्धालुओं पर “अपनी विचारधारा थोपने” का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस जनित महामारी का बहाना बनाकर शुक्रवार से रविवार तक मंदिरों को बंद रखने का कोई तुक नहीं है। उन्होंने कहा कि जब सिनेमाघर खुले हैं और सरकार बच्चों के लिए पुनः स्कूल खोलने जा रही है जिनके लिए टीका भी नहीं आया है, तो ऐसे में मंदिरों पर प्रतिबंध लगाने का कोई मतलब नहीं है। अन्नामलाई ने राज्य सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह कोविड-19 पर केंद्र के परामर्श को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा, “नवरात्रि का उत्सव आज से शुरू हो गया लेकिन राज्य सरकार ने वायरस जनित महामारी के फैलने का बहाना बनाकर शुक्रवार से रविवार तक मंदिरों को बंद रखने का निर्णय लिया है। इस तर्क का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि प्रतिबंधों पर केंद्र सरकार का परिपत्र केवल एक परामर्श है।”

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष ने मंदिरों को फिर से खुलवाने के लिए यहां द्रमुक सरकार के विरोध में बड़े प्रदर्शन की अगुआई की। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी को आज 12 प्राचीन मंदिरों के सामने विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा।

अन्नामलाई ने दस दिन में भाजपा की मांग मान लिये जाने का उम्मीद प्रकट की लेकिन यह भी कहा, “हम सरकार को फैसला बदलने के लिए 10 दिन का समय देते हैं अन्यथा हमारे पास सड़क पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने से सिवा कोई चारा नहीं बचेगा। कोरोना वायरस की आड़ में अपनी झूठी विचारधारा को थोपने के प्रयास का भाजपा एड़ी चोटी से विरोध करेगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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