भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने विधायक पद से इस्तीफे को टाला, अचानक निकल गए असम के दौरे पर, सियासी गलियारों में बना चर्चा का विषय
By एस पी सिन्हा | Updated: March 29, 2026 16:31 IST2026-03-29T16:31:07+5:302026-03-29T16:31:07+5:30
सियासत के जानकारों की मानें तो नितिन नबीन का विधायक पद से इस्तीफा टलना पहली नजर में एक सामान्य प्रशासनिक देरी लग सकती है, लेकिन बिहार की राजनीति में टाइमिंग कभी ‘सामान्य’ नहीं होती।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने विधायक पद से इस्तीफे को टाला, अचानक निकल गए असम के दौरे पर, सियासी गलियारों में बना चर्चा का विषय
पटना: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का विधायक पद से इस्तीफे को लेकर चल रही अटकलों के बीच उनके अचानक असम के डिब्रूगढ़ के लिए रवाना हो जाने से सियासी हलचल तेज हो गई है। कारण कि पहले खबर थी कि नितिन नबीन सुबह 9 से 10 बजे के बीच बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। तय समय सीमा के बावजूद उनका इस्तीफा फिलहाल टल गया है। लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी। अब सभी की नजर 30 मार्च की तय समय सीमा पर टिकी हुई है, जो संवैधानिक रूप से उनके लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सियासत के जानकारों की मानें तो नितिन नबीन का विधायक पद से इस्तीफा टलना पहली नजर में एक सामान्य प्रशासनिक देरी लग सकती है, लेकिन बिहार की राजनीति में टाइमिंग कभी ‘सामान्य’ नहीं होती। असम रवाना होने की वजह सामने आई है, पर असली सवाल यह है कि क्या यह केवल कार्यक्रमों की टाइमिंग का टकराव है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है। दरअसल, जब कोई नेता राज्य से केंद्र की राजनीति में शिफ्ट होता है, तो उसका हर कदम संकेत देता है- संगठन को, सहयोगियों को और विपक्ष को भी। भारतीय संविधान के अनुसार कोई भी जनप्रतिनिधि एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता।
नितिन नबीन हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, ऐसे में उन्हें विधायक पद छोड़ना अनिवार्य है। हालांकि इस्तीफे का समय भी राजनीति में अहम संकेत देता है। देरी को केवल प्रशासनिक कारणों से नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। वहीं, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस्तीफे की सूचना दी गई थी, लेकिन अचानक कार्यक्रम में बदलाव के कारण यह संभव नहीं हो पाया।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि दिल्ली में कुछ कार्यक्रम था, जिसके लिए मैं गया था। प्रदेश अध्यक्ष ने मुझे इस्तीफे की जानकारी दी तो मैं आ गया। लेकिन किसी इमरजेंसी के कारण भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष असम रवाना हो गए। अब जल्द ही जो तारीख निर्धारित होगी, उसमें इस्तीफा होगा। उल्लेखनीय है कि रविवार को बिहार विधानसभा में इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए विशेष तैयारी की गई थी। आमतौर पर छुट्टी रहने के बावजूद विधानसभा को खोला गया।
सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार भी दिल्ली से पटना लौटकर सुबह से मौजूद थे। लेकिन जिस इस्तीफे का इंतजार था वह नहीं हो सका। इसी बीच यह चर्चा भी तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि कई खबरों का दावा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को इस्तीफा नहीं देंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की भी पुष्टि फिलहाल नहीं है।
वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर डा. प्रेम कुमार ने साफ कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा देते हैं तो इसकी प्रक्रिया विधानसभा के माध्यम से ही पूरी होगी और इसकी जानकारी औपचारिक रूप से सामने आएगी। फिलहाल, दोनों नेताओं के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है। पार्टी के अंदर भी इस विषय पर चर्चा जारी है और सभी की नजरें आने वाले 24 घंटों पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही इस पूरे मामले पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।