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भाजपा नेता ने जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ वार्ता का विरोध किया, पीएजीडी पर साधा निशाना

By भाषा | Updated: November 15, 2020 19:44 IST

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जम्मू, 15 नवम्बर भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार चरुंगू ने पाकिस्तान के साथ जम्मू कश्मीर को लेकर वार्ता का विरोध करते हुए रविवार को कहा कि ‘‘स्थापित सिद्धांत में आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चलेगी।’’

भाजपा नेता ने गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) पर भी निशाना साधा और कहा कि ‘‘भाजपा, केंद्र सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के विरोध के नाम पर लोगों की राय को छलने की अब शायद ही कोई संभावना है।’’

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत करने वाले बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि ‘‘भारत के स्थाापित राष्ट्रीय, कूटनीतिक और राजनीतिक सिद्धांत में आतंक और वार्ता साथ-साथ नहीं चलेंगे जिसका आधार उन समझौतों में है जिस पर हस्ताक्षर भारत और पाकिस्तान द्वारा एक दशक से अधिक समय पहले किया गया था।’’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत को आश्वासन दिया था कि वह अपने नियंत्रण वाली जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए नहीं होने देगा लेकिन वह आज तक अपने वादे को निभाने में विफल रहा है।

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को कहा था कि भारत एवं पाकिस्तान अपनी राजनीतिक मजबूरियों से ऊपर उठें और संवाद की पहल करें। उन्होंने कहा था कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दोनों ओर बढ़ रही हताहतों की संख्या को देखना दुखद है।

वहीं मीरवाइज उमर फारुक के नेतृत्व वाले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने एक अलग बयान में कहा था कि कश्मीर मुद्दे को सुलझाने और नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों में बसे लोगों के ‘‘निरर्थक खून-खराबे’’ को रोकने के लिए भारत और पाकिस्तान को बातचीत करनी चाहिए।

पाकिस्तानी सेना ने शुक्रवार को नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए भारी गोलीबारी और गोलाबारी की जिसमें सुरक्षा बलों के पांच जवान शहीद हो गए और छह नागरिकों की मौत हो गई। भारतीय सैनिकों की जवाबी कार्रवाई में आठ पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 12 अन्य घायल हो गए। साथ ही भारतीय सेना की कार्रवाई में पाकिस्तान में बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचा।

भाजपा के राजनीतिक मामलों के विभाग के प्रभारी चरुंगू ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘इन बयानों की वर्तमान घटनाओं के संदर्भ में कोई प्रासंगिकता नहीं है। अलगाववादी खेमे या कश्मीर की तथाकथित मुख्यधारा की राजनीति में रहने वालों और उनके शीर्ष नेताओं को यह जानने की ज़रूरत है कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के प्रति व्यवहार, भूमिका और समर्थन के कारण पाकिस्तान के बारे में वार्ता विमर्श पूरी तरह से निरर्थक हो गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर के संबंध में किसी भी प्रकार के ‘विवाद के निपटारे’ का कोई मामला नहीं है क्योंकि विलय पत्र, शिमला समझौते और जम्मू कश्मीर को लेकर संसद द्वारा 1994 में सर्वसम्मति से पारित संकल्प के अनुसार कश्मीर एक सुलझा हुआ मुद्दा है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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