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भाजपा और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं ने कहा-अखबारों की पीडीएफ शेयर करना गैर कानूनी

By एसके गुप्ता | Updated: June 15, 2020 21:55 IST

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यवाहक सचिव एवं अधिवक्ता रोहित पांडेय ने लोकमत से कहा कि समाचार पत्र की पीडीएफ फाइल को सोशल मीडिया खासकर वाट्सअप पर शेयर करने का चलन बहुत बढ़ गया है। लोग बिना सब्सक्रिब्शन चार्ज दिए ही समाचार पत्रों की सॉफ्टकॉपी शेयर कर रहे हैं।

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ठळक मुद्देवाट्सअप पर किसी अखबार की पीडीएफ फाइल आप शेयर कर रहे हैं तो यह गैर कानूनी है।भाजपा प्रवक्ता एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अमन सिन्हा ने कहा कि अखबार की पीडीएफ में छेड़छाड़ करके अगर कोई उसे आगे फॉरवर्ड करता है।

नई दिल्ली: वाट्सअप पर किसी अखबार की पीडीएफ फाइल आप शेयर कर रहे हैं तो यह गैर कानूनी है। अखबार के आर्थिक हित और फेक न्यूज को लेकर खड़े हो रहे सवाल पर यह राय भाजपा के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की है। भाजपा प्रवक्ता एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अमन सिन्हा ने लोकमत से कहा कि अखबार की पीडीएफ में छेड़छाड़ करके अगर कोई उसे आगे फॉरवर्ड करता है। जिससे फेक न्यूज को बढ़ावा मिले तो यह पूरी तरह से गैर कानूनी है। ऐसे में समाचार पत्र के प्रबंधन का यह अधिकार है कि वह ऐसा करने वाले के विरूद्ध सिविल और आपराधिक दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई करे।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यवाहक सचिव एवं अधिवक्ता रोहित पांडेय ने लोकमत से कहा कि समाचार पत्र की पीडीएफ फाइल को सोशल मीडिया खासकर वाट्सअप पर शेयर करने का चलन बहुत बढ़ गया है। लोग बिना सब्सक्रिब्शन चार्ज दिए ही समाचार पत्रों की सॉफ्टकॉपी शेयर कर रहे हैं। इसमें समाचार पत्र का ब्रांड नेम लिखा होता है। अगर कोई पीडीएफ में फेक न्यूज चल रही है तो इससे समाचार पत्र के ब्रांड पर भी असर पड़ता है। इसलिए ऐसा करना कॉपी राइट कानून के खिलाफ है। समाचार पत्र का यह अधिकार है कि वह इसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करे।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल जोगडांड ने कहा कि न्यूज पेपर का बिजनेस मॉडल है कि पढ़नं वाले ने पैसे दिए सब्सक्रिप्शन लिया। अगर कोई एक सब्सक्रिप्शन पर उसे आगे फॉरवर्ड कर रहा है या आगे कईयों को बेच रहा है तो वह गलत है। इससे ट्रेड कॉपी राइट का भी उल्लंघन होता है। लोकमत समाचार पत्र अपने में बड़ा ब्रांड है। अगर कोई उसकी पीडीएफ को डाउनलोड कर आगे फॉरवर्ड करता है तो यह आईटी एक्ट का उल्लंघन है। क्योंकि इसमें कोई आल्टरेशन कर अगर फेक न्यूज चलाता है तो इससे समाचार पत्र की प्रतिष्ठा खराब होगी। ऐसे में समाचार पत्रों को भी यह जरूरी है कि जिस तरह गोपनीय दस्तावेजों की शेयरिंग को लेकर सॉफ्टवेयर बने हैं। वैसे साफ्टवेयर का उपयोग समाचार पत्र करें। जिससे केवल सब्सक्रिप्शन लेना वाला ही पीडीएफ खोलकर पढ़ सके और उसमें किसी तरह का ऑल्टरेशन न कर सके। अगर कोई ऐसा करता है तो यह समाचार पत्र का अधिकार है कि उसके खिलाफ वह आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई करे।

वरिष्ठ अधिवक्ता और आईटी मामलों के जानकार पवन दुग्गल ने लोकमत को बताया कि किसी भी समाचारपत्र की पीडीएफ या इलेक्ट्रॉनिक कॉपी को सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से प्रसारित करना पूरी तरह गैर कानूनी है. इस तरह के मामलों में प्रकाशकों के कई कानूनी अधिकार हैं. बिना पूर्व अनुमति के समाचार पत्र की प्रति प्रसारित की जाती है तो ये कॉपीराइट कानून का सीधा उल्लंघन है. इसके अतिरिक्त जालसाज़ी, धोखाधड़ी और आर्थिक हानि पहुंचाने का भी मामला बनता है. सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत ऐसे मामलों में कार्रवाई की जा सकती है. यह आईटी एक्ट की धारा 66 और 43 का उल्लंघन है जिसमें ऐसा करने वालों को 3 साल की सज़ा और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.

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