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संपत्ति के नुकसान एवं वसूली संबधी विधेयक मप्र विधानसभा में पारित, होगी दोगुनी वसूली

By भाषा | Updated: December 23, 2021 20:57 IST

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भोपाल, 23 दिसंबर आंदोलन एवं प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों से दोगुनी वसूली के प्रावधान वाला विधेयक मध्य प्रदेश विधानसभा में बृहस्पतिवार को पारित हो गया।

‘मध्य प्रदेश लोक एवं निजी संपत्ति को नुकसान का निवारण व नुकसानी की वसूली विधेयक-2021’ को प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल की मंजूरी मिलने के बाद राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और उसके बाद कानून लागू हो जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलने पर मध्य प्रदेश इस तरह का कानून बनाने वाला उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा के बाद तीसरा भाजपा शासित राज्य होगा।

इस कानून के अमल में आने के बाद आंदोलन एवं प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों एवं संगठनों से नुकसान की दोगुनी वसूली की जाएगी।

प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायत के चुनाव को लेकर सर्वसम्मति से पारित संकल्प पर नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ को सदन में बोलने की अनुमति नहीं देने को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सदस्यों द्वारा हंगामे एवं बहिर्गमन के दौरान यह विधेयक बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित किया गया।

बाद में मध्य प्रदेश के विधि और विधायी कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए इस विधेयक के बारे में कहा, ‘‘यह विधेयक आज विधानसभा से पारित हो गया है। शासकीय, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को विरोध प्रदर्शन, जुलूस या सांप्रदायिक दंगे के दौरान नुकसान पहुंचाने वाले अब कानून के दायरे में आ गए हैं।’’

वहीं, मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि लोक व्यवस्था की अशांति के दौरान संपत्तियों को पहुँचाये गये नुकसान की वसूली तथा किये गये नुकसान का निर्धारण करने के लिये दावा अधिकरण का गठन किया जाएगा। दावा अधिकरण, प्रतिकर भी अधिनिर्णित करेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह, जो कि सांप्रदायिक दंगा, हड़ताल, बंद, प्रदर्शन, जुलूस, यातायात का घेराव या लोगों का ऐसा जमाव जो किसी भी नाम से जाना जाता हो, के कारण किसी संपत्ति को कोई भी हानि या नुकसान होने पर नुकसान पहुँचाने वाला कार्य माना जाएगा।’’

मिश्रा ने बताया कि सार्वजनिक और निजी दोनों ही प्रकार की संपत्तियों को होने वाले नुकसान की दशा में वसूली के लिये 30 दिन में दावा अधिकरण के समक्ष दावा याचिका प्रस्तुत करनी होगी। जहां पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया है, वहाँ जिला मजिस्ट्रेट या सार्वजनिक संपत्ति से संबंधित अधिकारी दावा याचिका प्रस्तुत करेगा।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार जहाँ निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया है, वहाँ क्षतिग्रस्त संपत्ति का स्वामी उस तारीख से 30 दिन के भीतर दावा अधिकरण के समक्ष प्रतिकर अधिनिर्णित करने के लिये दावा याचिका प्रस्तुत करेगा।

मिश्रा ने बताया कि दावा अधिकरण में एक या अधिक सदस्य नियुक्त किये जा सकेंगे। दावा अधिकरण के सदस्य जिला न्यायाधीश के रूप में 5 वर्ष या उससे अधिक की सेवा करने वाले सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश या राज्य सरकार के सचिव स्तर के या समकक्ष अधिकारी होंगे।

उन्होंने कहा कि अधिकरण संपत्ति को होने वाले नुकसान का मूल्यांकन करके उसकी मुआवजा राशि का निर्धारण करेगा। अधिकरण यथासंभव 3 माह की अवधि में निराकरण करेगा।

इसी बीच, मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बयान जारी करके कहा, ‘‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन, धरना और आंदोलन किसी का लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन इसकी आड़ में कुछ अराजक तत्व तोड़-फोड़, आगजनी, सरकारी या सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने का कार्य करते हैं। इसे लोकतंत्र में कदापि उचित नहीं ठहराया जा सकता।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘इसलिए विधि अनुसार बाकी कार्रवाई तो होती है लेकिन ऐसे आंदोलनों के दौरान यदि कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह सार्वजनिक सम्पतियों को नुकसान पहुँचाएगा, तोड़-फोड़ करेगा, आगजनी करेगा तो जितना नुकसान होगा उसकी दोगुनी भरपाई उससे करवायी जाएगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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