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बिहार के गांव में पंचायत का फरमान- मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे दसवीं के छात्र-छात्रा, लिए गए ये अन्य बड़े फैसले

By एस पी सिन्हा | Updated: August 19, 2019 18:20 IST

बैठक में यह निर्णय किया गया कि इस निर्णय पर निगरानी के लिए एक कमेटी का गठन किया जायेगा. यह कमेटी इस पर नजर रखेगी. उप मुखिया अफाक आलम ने बताया है कि समाज कुरीतियों को ग्रहण कर रहा था.

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ठळक मुद्देगांव में शराब का सेवन और बिक्री करने पर रोक लगाई गई है.बैठक में यह भी निर्णय किया गया कि शादी विवाह या अन्य किसी भी अवसर पर गांव में किसी भी हाल में भोजपुरी गीत नहीं बजाया जायेगा.

बिहार के मधुबनी जिले बासोपट्टी प्रखंड अंतर्गत हत्थापुर परसा पंचायत के परसा गांव में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से दसवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं के मोबाइल पर पाबंदी लगाने का फरमान सुनाया है. इसमें यह भी निर्णय लिया गया कि यदि किसी भी परिवार द्वारा अवहेलना की जाती है, तो पहले उस परिवार के अभिभावक को सामाजिक स्तर पर समझाने का प्रयास किया जायेगा. यदि इसके बाद भी नहीं माने तो फिर आर्थिक जुर्माना और बाद में कानूनी कार्रवाई तक की जायेगी. 

प्राप्त जानकारी के अनुसार सैकडों ग्रामीणों ने बैठक कर समाज की कुरीतियों को दूर करने का सर्वसम्मति से निर्णय किया. इस दौरान दसवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं के मोबाइल पर पाबंदी लगाने, शराब पीने का बहिष्कार करने, सड़क का अतिक्रमण को दूर करने, रात में आठ बजे के बाद महिलाओं को खुले में शौच के लिए बाहर जाने सहित अन्य मुद्दे को उठाया गया. साथ ही इन पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का निर्णय किया गया. सबने एक स्वर में इन विचारों को माना. 

बैठक की अध्यक्षता स्थानीय सरपंच योगेंद्र मंडल ने की. सर्वसम्मति से निर्णय किया गया कि पढ़नेवाले लडकों-लडकियों के लिए मोबाइल पर प्रतिबंध लगेगा. अगर लड़कियों को अपने रिश्तेदारों से बात करना हो तब वह अपने अभिभावकों के सामने बात करेंगी. वहीं, लड़कियों को शाम से पहले अपने घर लौट जाने की अपील की गई. रात और शाम में घर से बाहर शौच के लिए निकलने पर रोक लगाई गई है. 

गांव में शराब का सेवन और बिक्री करने पर रोक लगाई गई है. ग्रामीणों ने कहा कि अगर समाज मे कोई शराब पीकर हंगामा करेंगे तो उनके विरुद्ध प्रशासन को सूचित किया जायेगा. गांव में शराबबंदी को सफल बनाने एवं जुंएबाजी बंद करने को भी लागू किया गया है. बैठक में यह भी निर्णय किया गया कि शादी विवाह या अन्य किसी भी अवसर पर गांव में किसी भी हाल में भोजपुरी गीत नहीं बजाया जायेगा. हिंदी या मैथिली गीत ही बजेंगे. इसके अलावा गांव में किसी भी मेले के आयोजन के दौरान आर्केस्ट्रा का आयोजन नहीं होगा. वहीं, शादी विवाह में लडकियों व महिलाओं के नाचने पर भी बैठक में समाज ने बहिष्कार का निर्णय किया. 

बैठक में यह निर्णय किया गया कि इस निर्णय पर निगरानी के लिए एक कमेटी का गठन किया जायेगा. यह कमेटी इस पर नजर रखेगी. उप मुखिया अफाक आलम ने बताया है कि समाज कुरीतियों को ग्रहण कर रहा था. छोटी-छोटी उम्र में ही बच्चों के हाथ में मोबाइल आने, रात को खुले में शौच के लिए बाहर जाने का परिणाम खराब आ रहा है. इसके अलावा शराब पीकर हंगामा करने के कारण आपसी मतभेद बढ़ता जा रहा है. इस कारण निर्णय लिया गया.

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