नीतीश कुमार की जगह कौन लेगा?, भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए 4 नाम सबसे आगे, देखिए लिस्ट
By एस पी सिन्हा | Updated: March 5, 2026 16:02 IST2026-03-05T16:00:58+5:302026-03-05T16:02:20+5:30
सियासी गलियारों में यह चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़ी है।

file photo
पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार में सत्ता परिवर्तन होना तय हो गया है। बिहार में भाजपा का अपना पहला मुख्यमंत्री बनने जा रहा है। 15 से 18 नवंबर को भाजपा बिहार में अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी और संजीव चौरसिया का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि भाजपा नया दाव चलते हुए किसी महिला को भी मुख्यमंत्री की कमान सौंप सकती है। ऐसे में बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
सबसे पहले नाम बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का लिया जा रहा है। मुंगेर के लखनपुर में जन्मे सम्राट चौधरी बिहार भाजपा के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। हालांकि राजद से जदयू होते हुए उन्होंने भाजपा में कदम रखा है। उनपर कई गंभीर आरोप भी लग चुके हैं। जिसमें हत्याकांड भी शामिल है। हालांकि सम्राट चौधरी बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
दूसरा प्रमुख नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का है। वे उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। नित्यानंद राय साल 2000 से सक्रिय राजनीति में हैं और बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यादव समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में एक मजबूत दावेदार बनाती है।
तीसरा नाम बिहार भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का सामने आ रहा है। खगड़िया में जन्मे दिलीप जायसवाल लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं। वे करीब 22 वर्षों तक पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे हैं और नीतीश सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। वे कलवार जाति से आते हैं, जो अन्य पिछड़ा वर्ग का हिस्सा है।
सीमांचल क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ भी उन्हें इस दौड़ में अहम बनाती है। वहीं, सियासत के जानकारों का मानना है कि भाजपा के लिए महिला मुख्यमंत्री का कार्ड भी एक बड़ा और चौंकाने वाला राजनीतिक दांव बन सकता है। भाजपा अगर दिल्ली की तरह बिहार में भी महिला नेतृत्व का दांव खेलती है तो क्या राज्य को दूसरी महिला मुख्यमंत्री मिल सकती है।
सियासी गलियारों में यह चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। कुल 29 महिला विधायक विधानसभा पहुंची हैं। इनमें से 10 विधायक भाजपा की हैं। अगर भाजपा महिला को मुख्यमंत्री बनाती है तो राज्य को दूसरी महिला मुख्यमंत्री मिल सकती है।
बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री राबड़ी देवी रही हैं। हालांकि, अभी तक भाजपा की ओर से इस तरह का कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। सियासत के जानकारों का मानना है कि भाजपा अगर महिला मुख्यमंत्री का कार्ड खेलती है तो उसके पास कई नाम मौजूद हैं। इनमें रेणु देवी राज्य की पूर्व उप मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं।
दूसरा नाम रमा निषाद का लिया जाता है। राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। निषाद समाज बिहार के कई इलाकों में प्रभावशाली माना जाता है। इसके साथ ही एक चर्चित नाम श्रेयसी सिंह का माना जाता है। श्रेयसी सिंह राष्ट्रीय स्तर की शूटर रह चुकी हैं और बाद में राजनीति में सक्रिय हुईं। वे जमुई क्षेत्र से विधायक हैं और खेल तथा आईटी की मंत्री भी हैं।
युवा चेहरा होने के कारण उनकी छवि आधुनिक और शिक्षित नेता की मानी जाती है। खेल जगत से आने के कारण उनकी पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर बनी हुई है। इसके अलावे गायत्री देवी का नाम भी सामने आता है। वे सीतामढ़ी जिले की परिहार सीट से विधायक हैं। वहीं, निशा सिंह ने प्राणपुर सीट से जीत हासिल की, वे पिछड़ा बैकग्राउंड से हैं और स्थानीय मुद्दों पर मजबूत हैं।
ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि 16 मार्च के बाद बिहार की सत्ता किस नेता के हाथों में जाती है? अभी बिहार में सरकार का ढांचा ऐसा है कि जदयू का मुख्यमंत्री है और भाजपा के दो उपमुख्यमंत्री हैं। लेकिन, नए संभावित फॉर्मूले में तस्वीर बदल सकती है। चर्चाओं के अनुसार भविष्य में भाजपा का मुख्यमंत्री और जदयू के दो उपमुख्यमंत्री का फार्मूला लागू किया जा सकता है।
अगर ऐसा होता है तो पहला नाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का हो सकता है, जिन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जाना लगभग तय माना जा रहा है। जबकि दूसरे में विजय चौधरी के नाम की चर्चा है। वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी मंत्रियों में से एक हैं।
बिहार विधानसभा में भाजपा के पास करीब 89 विधायक हैं, जिससे वह एनडीए में सबसे बड़ी पार्टी है। जबकि 85 विधायक हैं। उल्लेखनीय है कि भाजपा अक्सर चौंकाने वाले फैसलों के लिए जानी जाती है। ऐसे में भाजपा अगर बिहार से किसी ऐसे चेहरे को मुख्यमंत्री बना दे, जिसकी कहीं दूर-दूर चर्चा भी नहीं रही तो हैरानी की बात नहीं होगी।