विधायक चोरी बंद करो, लोकतंत्र की रक्षा करो?, वोट चोर-गद्दी छोड़!, बिहार राज्यसभा चुनाव में हार, कांग्रेस ने पीएम मोदी का पुतला 

By एस पी सिन्हा | Updated: March 17, 2026 15:59 IST2026-03-17T15:58:22+5:302026-03-17T15:59:15+5:30

राजेश राम के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एनडीए सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पीएम मोदी का पुतला भी दहन किया।

Bihar Rajya Sabha elections Defeat Congress burns effigy of PM Modi Stop MLA theft, protect democracy Vote thieves leave throne | विधायक चोरी बंद करो, लोकतंत्र की रक्षा करो?, वोट चोर-गद्दी छोड़!, बिहार राज्यसभा चुनाव में हार, कांग्रेस ने पीएम मोदी का पुतला 

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Highlightsप्रदर्शनकारियों के निशाने पर केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टी रही। हवा में गूंजते कुछ प्रमुख नारे थे।विपक्षी को डरा-धमकाकर या प्रलोभन देकर लोकतंत्र को दूषित किया जा रहा है।किसी भारी दबाव में हैं और स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।

पटनाः बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। चुनाव के दौरान महागठबंधन के चार विधायकों के वोट देने न पहुंचने (जिनमें तीन कांग्रेस के विधायक शामिल थे) को पार्टी ने लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। इसी के विरोध में आज बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय, सदाकत आश्रम के मुख्य द्वार पर भारी संख्या में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एनडीए सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पीएम मोदी का पुतला भी दहन किया।

प्रदर्शनकारियों के निशाने पर केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टी रही। हवा में गूंजते कुछ प्रमुख नारे थे। जिसमें “विधायक चोरी बंद करो, लोकतंत्र की रक्षा करो!”, “वोट चोर-गद्दी छोड़!” और “राहुल गांधी जिंदाबाद, राजेश राम जिंदाबाद! शामिल है। कार्यकर्ताओं ने एनडीए सरकार का पुतला फूंकते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी को डरा-धमकाकर या प्रलोभन देकर लोकतंत्र को दूषित किया जा रहा है।

प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बात करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने अपनी नाराजगी और हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है कि जो विधायक कल तक हमारे साथ बैठक की प्रक्रिया का हिस्सा थे, वे अचानक वोटिंग के समय कहां गायब हो गए। फिलहाल ऐसा प्रतीत होता है कि वे किसी भारी दबाव में हैं और स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले की तह तक जाएगी। जब उन विधायकों से सीधी बात होगी, तभी स्थिति स्पष्ट होगी कि आखिर ऐन वक्त पर ऐसा क्या हुआ। वे खुद को आजाद महसूस कर रहे हैं या किसी के गुलाम बन गए हैं, यह जवाब उन्हें ही देना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि जो भी विधायक पार्टी लाइन से हटे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, मनिहारी से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने महागठबंधन पर आरोप लगाया कि दलित, अल्पसंख्यक और ओबीसी वर्ग की अनदेखी करते हुए उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिसके विरोध में उन्होंने मतदान का बहिष्कार किया। फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास ने भी पार्टी नेतृत्व पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब विधायकों को सम्मान नहीं मिलेगा तो वोट देने का कोई मतलब नहीं है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे पार्टी की किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। इधर, ढाका से राजद विधायक फैसल रहमान ने मतदान में शामिल नहीं होने की वजह पारिवारिक बताई। उन्होंने कहा कि वे अपनी बीमार मां के इलाज के लिए दिल्ली में थे।

कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने भी उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि महागठबंधन ने सही उम्मीदवार नहीं चुना, इसलिए उन्होंने मतदान से दूरी बनाई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार दबाव की राजनीति कर रही है और विधायकों को प्रभावित किया जा रहा है।

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