Bihar: जेलों में बंद कैदी अब करेंगे पेट्रोल पंपों का संचालन, जेल प्रशासन की खाली पड़ी जमीन पर स्थापित किए जाएंगे पेट्रोल पंप
By एस पी सिन्हा | Updated: May 13, 2026 14:09 IST2026-05-13T14:09:50+5:302026-05-13T14:09:54+5:30
Bihar: कैदियों को जेल मैनुअल के अनुसार ही राशि मिलेगी. वर्तमान में, जेलों में विभिन्न प्रकार के उत्पादन कार्यों में जुड़े कैदियों को पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है.

Bihar: जेलों में बंद कैदी अब करेंगे पेट्रोल पंपों का संचालन, जेल प्रशासन की खाली पड़ी जमीन पर स्थापित किए जाएंगे पेट्रोल पंप
Bihar: बिहार सरकार ने जेलों में कैद कैदियों के सुधार और पुनर्वास के उद्देश्य से नई पहल की शुरुआत की है. इस नई पहल के तहत बिहार की जेलों में बंद कैदी अब पेट्रोल पंप का संचालन करेंगे। यह योजना जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास का हिस्सा है. गृह (कारा) विभाग ने इसे लेकर विस्तृत प्रारूप तैयार कर लिया है. प्रस्ताव के मुताबिक, जेल प्रशासन की खाली पड़ी जमीन पर पेट्रोल पंप स्थापित किए जाएंगे और उनके संचालन का जिम्मा उसी जेल में रहने वाले कैदियों को सौंपा जाएगा. इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए विभाग ने इस प्रस्ताव को वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेज दिया है.
वित्त विभाग के बाद विधि विभाग से भी हरी झंडी ली जाएगी और इसके बाद अंत में राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद योजना लागू होगी. इस पहल का उद्देश्य कैदियों को रोजगार से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. साथ ही जेल की खाली जमीन का सदुपयोग भी हो सकेगा. इसके तहत पूर्णिया सेंट्रल जेल में राज्य का पहला पेट्रोल पंप खुलेगा. यह प्रदेश की पहली जेल होगी जहां जेल के कैदी ही पेट्रोल पंप का संचालन करेंगे.
जबकि इससे होने वाली आमदनी भी जेल के कैदियों के कल्याण में ही खर्च होगी. बताया जाता है कि केवल वैसे कैदी जो सुधार प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हैं और जिनका आचरण अच्छा है, उन्हें ही इसके संचालन का जिम्मा दिया जाएगा. खूंखार, गंभीर अपराध के आरोपी या विचाराधीन कैदियों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा. इसके तहत कारा विभाग हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के साथ मिलकर यह पेट्रोल पंप शुरू करने की योजना बना रहा है.
राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद गृह (कारा) विभाग पेट्रोलियम कंपनियों के साथ पेट्रोल पंप संचालन के लिए समझौता (एमओयू) करेगा. इन पेट्रोल पंपों पर होने वाली पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की निगरानी के लिए भी तंत्र विकसित किया जाएगा. बिहार में आठ केंद्रीय कारागारों समेत कुल 59 जेलों की क्षमता 47,750 है, लेकिन इन जेलों में 61,891 कैदी हैं. इसका मतलब यह हुआ कि जेलों में क्षमता के मुकाबले 30 फीसदी अधिक कैदी हैं.
जेलों में उद्यमिता के विकास, योग, ध्यान एवं सुधार के भी कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. पेट्रोल पंप के संचालन का दायित्व संभालने वाले कैदियों को पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा. कैदियों को जेल मैनुअल के अनुसार ही राशि मिलेगी. वर्तमान में, जेलों में विभिन्न प्रकार के उत्पादन कार्यों में जुड़े कैदियों को पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है.
जानकारी के अनुसार, बिहार की जेलों में सजायाफ्ता कैदियों को उनके कौशल के आधार पर प्रतिदिन 147 रुपए से 397 रुपए तक का पारिश्रमिक मिलता है. इन्हें 4 श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें अकुशल (4 घंटे कार्य) को 147 रुपए, अकुशल को 294 रूपए, अर्द्ध कुशल को 309 रुपये और कुशल कैदियों को 397 रुपए प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है. बताया जाता है कि ड्यूटी के दौरान कैदियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए जेल वार्डन और सुरक्षाकर्मी भी सादे कपड़ों में तैनात रहेंगे.