“नकली डिग्री” को लेकर तीखी बहस?, बिहार विधान परिषद में मंत्री अशोक चौधरी को लेकर राजद सदस्य सुनील सिंह ने की टिप्पणी
By एस पी सिन्हा | Updated: February 18, 2026 17:01 IST2026-02-18T16:59:51+5:302026-02-18T17:01:25+5:30
सुनील सिंह ने पलटवार करते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि बुद्धि और समझदारी पर सवाल न उठाया जाए। चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि वे चाहें तो डिग्री से जुड़ी पूरी सच्चाई सामने ला सकते हैं और उन्हें पता है कि डिग्री कैसे प्राप्त की गई है।

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पटनाःबिहार विधान परिषद में बुधवार को एक बार फिर मंत्री अशोक चौधरी और राजद सदस्य सुनील सिंह के बीच कथित “नकली डिग्री” को लेकर तीखी बहस ने सदन की कार्यवाही को गर्मा दिया। दरअसल धान खरीद के मुद्दे पर चर्चा के दौरान दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई।
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विधान पार्षद महेश्वर सिंह ने सवाल उठाया कि पैक्स द्वारा नमी का बहाना बनाकर किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है। उन्होंने कहा कि धान खरीद की अवधि समाप्त होने में महज आठ दिन शेष हैं, जबकि लगभग 10 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद बाकी है। ऐसे में किसान मजबूरी में कम कीमत पर बाजार में धान बेचने को विवश हो रहे हैं।
जवाब में प्रभारी मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि इस विषय पर केंद्रीय मंत्री से बातचीत हुई है और धान खरीद की समय-सीमा बढ़ाने पर विचार चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं कम मात्रा में चावल दिया जा रहा है तो आवेदन मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। इसी दौरान उन्होंने पूरक प्रश्न पूछने वाले सदस्य पर इशारों में तंज कसते हुए कहा कि “पहले 15 साल क्या होता था, तब धान का प्रोक्योरमेंट ही नहीं होता था। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि पूरक प्रश्न पूछने वाले को शायद पूरी जानकारी नहीं है।
इस टिप्पणी पर सुनील सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि उनकी बुद्धि और समझदारी पर सवाल न उठाया जाए। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि वे चाहें तो डिग्री से जुड़ी पूरी सच्चाई सामने ला सकते हैं और उन्हें पता है कि डिग्री कैसे प्राप्त की गई है। इस पर अशोक चौधरी भी आग बबूला हो गए और कहा कि उनकी डिग्री को गलत साबित करके दिखाया जाए, अन्यथा आरोप लगाने वाले को परिषद से इस्तीफा देना होगा। सुनील सिंह ने जवाब में कहा कि उन्हें पता है “अशोक कुमार कौन हैं और अशोक चौधरी कौन हैं,” जिससे सदन में शोर-शराबा बढ़ गया।
स्थिति बिगड़ती देख सभापति अवधेश नारायण सिंह ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि कोई सदस्य किसी पर आरोप लगाता है तो उसे दस्तावेज और नियमों के आधार पर ही आरोप लगाना चाहिए। बिना प्रमाण के सदन में किसी पर भी आरोप नहीं लगाया जा सकता।
उन्होंने सदन को याद दिलाया कि नियमावली के अनुसार बिना प्रमाण के किसी पर आरोप लगाना सदन की परंपरा के खिलाफ है। इसके बाद सभापति ने दोनों पक्षों को आपसी विवाद सदन में नहीं उठाने की हिदायत दी। इस तरह धान खरीद जैसे गंभीर मुद्दे पर शुरू हुई चर्चा व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई, जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही।