मुख्यमंत्री आवास पर राजनीतिक हलचल तेज?, सीएम नीतीश कुमार से मिले ललन सिंह, अशोक चौधरी, संजय झा और बिजेंद्र यादव
By एस पी सिन्हा | Updated: March 30, 2026 13:33 IST2026-03-30T13:31:54+5:302026-03-30T13:33:23+5:30
Bihar: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा मंत्री विजय चौधरी और विधान पार्षद संजय गांधी के द्वारा विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा गया, जिसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया।

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पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी बिहार विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा सौंप दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और जदयू के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने इस बात की जानकारी दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा मंत्री विजय चौधरी और विधान पार्षद संजय गांधी के द्वारा विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा गया, जिसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया।
विजय चौधरी ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, इसलिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी अनिवार्य थी। इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी विधायक पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को सौंपा।
वहीं, संजय सरावगी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन जी को रविवार (29 मार्च) को अचानक से असम जाना पड़ा था। इस कारण से वह कल ही मुझे अपना इस्तीफा पत्र सौंपकर गए थे। उसे आज समय पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार जी को सौंप दिया गया।
वहीं, राज्यसभा के नवनिर्वाचित सांसद और भाजपा के राष्ट्री अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपना इस्तीफा देने से पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लिखा कि आज, मैं बिहार विधानसभा में बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले निर्वाचित सदस्य के पद से इस्तीफा दे रहा हूं। मुझे सौंपी गई नई भूमिका के माध्यम से, मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र और बिहार राज्य के विकास के लिए सदैव तत्पर और प्रतिबद्ध रहूंगा।
इसबीच बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री से आज सुबह उनके आवास पर ही शिष्टाचार मुलाकात हुई। उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा स्वीकार हो गया है। वहीं, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि संवैधानिक नियमों के अनुसार नीतीश कुमार चाहें तो अगले छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। यह प्रावधान तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति सदन का सदस्य न होते हुए भी मुख्यमंत्री पद संभाल रहा हो।
इसी बीच नितिन नबीन ने अपनी मां को याद करते हुए एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि मां भले अब उनके साथ नहीं हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद और एहसास हमेशा उनके जीवन में मौजूद है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जब तक मां साथ हों, उन्हें पूरा सम्मान और समय देना चाहिए, क्योंकि मां जीवन की सबसे अनमोल धरोहर होती हैं।
उल्लेखनीय है कि 16 मार्च को नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। संवैधानिक नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को एक साथ दो सदनों की सदस्यता रखने की अनुमति नहीं होती, इसलिए 14 दिनों के भीतर एक पद से इस्तीफा देना आवश्यक होता है। इसी प्रक्रिया के तहत उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता छोड़ी है।
उधर, सोमवार सुबह से ही मुख्यमंत्री आवास पर राजनीतिक हलचल तेज रही। इस दौरान ललन सिंह, अशोक चौधरी, संजय झा और बिजेंद्र यादव समेत कई वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। करीब 10:30 बजे संजय गांधी उनका इस्तीफा लेकर विधान परिषद पहुंचे और औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
चर्चा है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में बदलाव संभव है। कुछ कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हैं, तो भाजपा राज्य में अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। हालांकि अभी इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद बाहर जाते समय केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह ने पत्रकारों से कोई बात नहीं की।