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बिहार में खरमास बाद क्या सियासी भूचाल आएगा?, पाला बदलने को बेताब नेताओं को शुभ दिन का इंतजार, कई सांसद भी नया ठिकाना तलाशने में जुटे!

By एस पी सिन्हा | Updated: January 7, 2023 16:06 IST

बिहारः भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने पार्टी छोड़ दी है। लोजपा प्रमुख व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने श्रवण को पार्टी से निकाल दिया है।

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ठळक मुद्देशुभ मुहूर्त के आने का बेसब्री से इंतजार है।बिहार में खरमास खत्म होने के बाद दल बदलने की परंपरा भी रही है। वर्तमान में घोषित तौर पर दो नेताओं को शुभ मुहूर्त का बेसब्री से इंतजार है।

पटनाः बिहार में खरमास बाद क्या सियासी भूचाल आएगा? सियासी गलियारे में चल रही चर्चाओं पर अगर गौर करें तो चूड़ा-दही के भोज के बाद सूबे की सियासी तस्वीर बद सकती है। जारी अटकलों के अनुसार पाला बदलने को बेताब कई नेताओं को खरमास खत्म होने और शुभ मुहूर्त के आने का बेसब्री से इंतजार है।

चर्चा है कि कई सांसद भी भविष्य की राजनीति अंधकार मय देखकर नया ठिकाना तलाशने में जुट गए हैं। बता दें कि भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने पार्टी छोड़ दी है। इसी तरह लोजपा प्रमुख व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने श्रवण को पार्टी से निकाल दिया है। दोनों के दोनों वर्तमान में किसी भी दल में नहीं है।

चर्चा है कि कई दलों के संगठन से जुड़े प्रदेश पदाधिकारी भी प्रदेश नेतृत्व से असंतुष्ट होकर दल और दिल बदलने की तैयारी कर रहे हैं। उल्लेखनीत है कि बिहार में खरमास खत्म होने के बाद दल बदलने की परंपरा भी रही है। इसी को दोहराने की तैयारी चल रही है। वर्तमान में घोषित तौर पर दो नेताओं को शुभ मुहूर्त का बेसब्री से इंतजार है।

दोनों नेता अपने-अपने दल के लिए मीडिया मैनेजर के रूप में शुमार रहे हैं। अब दोनों नया ठौर तलाश रहे हैं। बिहार में वर्ष 2018 के चूड़ा-दही भोज के बाद कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने पाला बदल लिया था, तब जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह की ओर से भोज का आयोजन हुआ था।

डेढ़ महीने बाद अशोक चौधरी जदयू में शामिल हो गए थे। इसबीच सत्तारूढ़ दल की ओर से एक ही दिन दो भोज के आयोजन की घोषणा को लेकर कई मायने निकाले जा रहे हैं। पहला भोज राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर होगा। वहीं, दूसरा चूड़ा-दही का न्यौता जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा दे रहे हैं।

ऐसे में चूडा-दही के बहाने सियासत तेज होने की संभावना व्यक्त की जाने लगी है। राजद में भी काफी उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। संभव है कि खरमास बाद सत्ता की ताज तेजस्वी यादव के सिर सज भी सकता है। उसका गणित भी बिठाया जा रहा है। भाजपा के द्वारा भी कई तरह के दावे किये जा रहे हैं। ऐसे चूडा-दही के बहाने नये सियासी ठिकाने तलाशे जा सकते हैं।

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