बिहार: नीतीश कुमार सुनियोजित रणनीति के तहत सौंपेंगे भाजपा को बिहार की सत्ता, 30 मार्च तक दे सकते हैं बिहार विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र
By एस पी सिन्हा | Updated: March 22, 2026 16:09 IST2026-03-22T16:09:14+5:302026-03-22T16:09:14+5:30
फिलहाल सत्ता में संतुलन बनाए रखने के लिए भाजपा और जदयू के बीच बातचीत का दौर लगातार जारी है। फिलहाल जदयू और भाजपा के बीच मंत्रालय और दिल्ली की राजनीति को लेकर बातचीत का दौर जारी है।

बिहार: नीतीश कुमार सुनियोजित रणनीति के तहत सौंपेंगे भाजपा को बिहार की सत्ता, 30 मार्च तक दे सकते हैं बिहार विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र
पटना:बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुनियोजित रणनीति के तहत बिहार की सत्ता की चाबी भाजपा को सौंपने की तैयारी कर चुके हैं। चर्चा है कि नीतीश कुमार दो चरणों में इस्तीफा देने वाले हैं। अभी 30 मार्च तक वह बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे, फिर 13-14 अप्रैल तक मुख्यमंत्री का पद भी त्याग देंगे। ऐसे में बिहार में सत्ता परिवर्तन के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी है। बहुत शांत तरीके से इसको अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। फिलहाल सत्ता में संतुलन बनाए रखने के लिए भाजपा और जदयू के बीच बातचीत का दौर लगातार जारी है। फिलहाल जदयू और भाजपा के बीच मंत्रालय और दिल्ली की राजनीति को लेकर बातचीत का दौर जारी है।
जानकारों के अनुसार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनते ही पार्टी बड़े भाई की भूमिका में आ जाएगी। यही कारण है कि जदयू फूंक-फूंक कर अपने कदम आगे बढ़ा रही है। सूत्रों के मुताबिक बिहार में मुख्यमंत्री भाजपा का ही होगा। इसके बदले में जदयू के कोटे में दो उपमुख्यमंत्री दिए जाएंगे। कारण कि जदयू कोटे से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं तो सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भाजपा कोटे से दो उपमुख्यमंत्री हैं। गठबंधन में नई सरकार का जो फार्मूला है उसको लेकर बात आगे बढ़ रही है।
जानकारी के मुताबिक भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ 15 मंत्री होंगे जबकि जदयू को दो उपमुख्यमंत्री समेत 16 मंत्री पद दिए जाएंगे। सहयोगियों को ठीक इस फार्मूले के तहत एडजस्ट किया जाएगा जैसा अभी है। इतना ही नहीं, भाजपा किसी भी कीमत पर गृह मंत्रालय अपने पास रखेगी। साथ ही साथ विधानसभा अध्यक्ष का पद भी भाजपा के ही पास रहेगा। बिहार विधान परिषद के सभापति के तौर पर जदयू के किसी सदस्य को जिम्मेदारी दी जा सकती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की चर्चा जोरों पर है।
सूत्रों के मुताबिक बिहार में नए मुख्यमंत्री का शपथ 15 अप्रैल को हो सकता है। तब तक नीतीश कुमार भी 10 अप्रैल से राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल शुरू कर सकते हैं। इसबीच जदयू सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार केंद्र में मंत्री नहीं बनने जा रहे हैं। वह बिहार की राजनीति में ज्यादा सक्रिय रहेंगे। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी हाल में ही कहा था कि वह संसद का सत्र छोड़कर बाकी समय बिहार में ही रहेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? बिहार के मुख्यमंत्री के चेहरों के तौर पर कई नाम चर्चा में हैं। इसमें मौजूदा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। हाल के कार्यक्रमों और राजनीतिक संकेतों में भी उनका कद बढ़ता दिखा है। इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री दिलीप जायसवाल और मंगल पांडेय के अतिरिक्त मुस्लिम चेहरा शाहनवाज हुसैन शामिल हैं।
इसके साथ ही महिला कोटे से भी मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, एनडीए के अंदर अभी तक किसी नाम पर औपचारिक सहमति नहीं बनी है और बताया जा रहा है कि अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही होगा। ऐसे में एनडीए के लिए यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। एक तरफ गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना है, तो दूसरी तरफ नेतृत्व परिवर्तन को बिना किसी असंतोष के अंजाम देना है। बताया जा रहा है कि 26 मार्च तक चल रही “समृद्धि यात्रा” के समापन के बाद ही इस मुद्दे पर औपचारिक चर्चा शुरू होगी। फिलहाल राजनीतिक रूप से माहौल तैयार किया जा रहा है, ताकि बदलाव अचानक न लगे बल्कि योजनाबद्ध दिखे।