“हमें हमारा हक दो” और “नीतीश के सम्मान में बेटियां मैदान में”?, बीपीएससी टीआरई-4 नोटिफिकेशन को लेकर पटना में सड़क पर उतरे शिक्षक अभ्यर्थी
By एस पी सिन्हा | Updated: March 18, 2026 17:48 IST2026-03-18T17:42:05+5:302026-03-18T17:48:36+5:30
छात्रों का कहना है कि वे 2 साल से इस वैकेंसी की राह देख रहे हैं, लेकिन प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है।

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पटनाः बीपीएससी टीआरई-4 नोटिफिकेशन जल्द जारी करने की मांग को लेकर शिक्षक अभ्यर्थी बुधवार को राजधानी पटना के सड़कों पर उतरे। पटना यूनिवर्सिटी के पटना कॉलेज परिसर निकले शिक्षक अभ्यर्थियों के हाथों में “हमें हमारा हक दो” और “नीतीश के सम्मान में बेटियां मैदान में” जैसे नारों वाली तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यहां से अभ्यर्थियों का जत्था बीपीएससी दफ्तर और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने की तैयारी में था। लेकिन जेपी गोलंबर के पास पहले से भारी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने आगे बढने से रोक दिया। इस दौरान उनके बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
दरअसल, अभ्यर्थियों ने आयोग को 17 मार्च की रात तक का समय दिया था। नोटिफिकेशन जारी न होने पर छात्र नेता दिलीप के नेतृत्व में इस बड़े आंदोलन का आगाज किया। छात्रों का कहना है कि वे 2 साल से इस वैकेंसी की राह देख रहे हैं, लेकिन प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है।
छात्र नेता दिलीप ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ में लगातार टीआरई-4 का जिक्र कर रहे हैं। वहीं, शिक्षा विभाग ने जिलों से रिक्तियां भेज दी हैं, फिर भी बीपीएससी नोटिफिकेशन जारी नहीं कर रहा। हालांकि, यह मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना है, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है।
छात्रों का कहना है कि वे अब और इंतजार नहीं करेंगे, उन्हें सिर्फ और सिर्फ नोटिफिकेशन की तारीख चाहिए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि यदि जल्द ही बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर टीआरई-4 का नोटिफिकेशन अपलोड नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा। छात्रों की मुख्य मांग है कि परीक्षा का कैलेंडर जारी हो और रिक्तियों की संख्या पारदर्शी तरीके से बताई जाए।
यूजीसी रेगुलेशन लागू करने और 65 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर एआईएसएफ के छात्र उतरे सड़कों पर
यूजीसी रेगुलेशन लागू करने और 65 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर बुधवार को एआईएसएफ के बैनर तले छात्र राजधानी पटना की सडकों पर उतरे। लेकिन छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय बिगड़ गए, जब पुलिस ने उन्हें जेपी गोलबंर से आगे बढने से रोक दिया। पुलिस के रोकने के बाद भी छात्र नहीं माने।
उन्होंने बैरिकेडिंग तोड़ दी और आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। डाकबंगला इलाके में पुलिस ने फिर से बैरिकेडिंग कर छात्रों को रोकने की कोशिश की। कुछ छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। वहीं कई छात्र सड़क पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हल्की नोकझोंक हुई।
हालात बिगड़ते देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि कॉलेजों में भेदभाव और अपमान अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक छात्र ने कहा कि वे अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं। इस प्रदर्शन में छात्र संगठन आईसा और भीम सेना के कार्यकर्ता शामिल थे। माले नेता दिव्या गौतम भी समर्थकों के साथ मौके पर मौजूद रहीं।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि बिहार में यूजीसी के नियमों को पूरी तरह लागू किया जाए। साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी, ईबीसी और बीसी वर्गों के लिए 65 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। छात्र नेताओं का कहना है कि शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का सही पालन जरूरी है। उनका आरोप है कि कई संस्थानों में यूजीसी गाइडलाइंस लागू नहीं हो रही हैं।
उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यूजेसी के नए नियमों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि नियमों के प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है। यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को संशोधित नियम जारी किए थे। एक वर्ग इन्हें जरूरी मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग विरोध में है।

