बिहार में सत्ता हस्तांतरण की उल्टी गिनती?, दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, 10 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे
By एस पी सिन्हा | Updated: April 9, 2026 14:49 IST2026-04-09T14:48:26+5:302026-04-09T14:49:23+5:30
जानकारों कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे के बाद एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी।

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पटनाः राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को दिल्ली चले गए। नीतीश कुमार 10 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण में भाजपा और जदयू के कई बड़े नेता शामिल होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली जाने पर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि 10 तारीख को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शपथ लेंगे। इसके बाद 13 तारीख के बाद बिहार में नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सियासी गलियारों में पिछले कई दिनों से लगातार खरमास के बाद बिहार में नई सरकार के गठन की चर्चा जोरों पर थी। दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले मंत्री विजय चौधरी ने बिहार में नई सरकार के गठन पर कहा कि अभी तो नीतीश कुमार ही हैं। अभी इस्तीफा कहां दिए हैं? इस्तीफे के बाद ही कुछ होगा।
इस बीच जानकारों कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे के बाद एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में नए नेता का चुनाव किया जाएगा। नया नेता मुख्यमंत्री पद का दावा पेश करेगा। इसके बाद राज्यपाल के समक्ष सरकार गठन का दावा प्रस्तुत किया जाएगा। सियासी जानकारों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया पहले से तय रोडमैप के तहत आगे बढ़ रही है।
जिसमें समय-सीमा और कदम लगभग स्पष्ट हैं। इस घटनाक्रम के साथ ही बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। वहीं, नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद पहली बार बिहार में भाजपा खुद का मुख्यमंत्री बनाएगी। इस पद के लिए मौजूदा उपमुख्यमंत्री का नाम सबसे आगे चल रहा है। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।
क्योंकि 2005 के बाद से नीतीश कुमार लगातार सत्ता के केंद्र में रहे हैं। इसके साथ ही करीब दो दशक तक मुख्यमंत्री पद संभालने वाले नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उनका फोकस दिल्ली की राजनीति पर होगा, जहां वे केंद्र स्तर पर अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
यह कदम जदयू और एनडीए दोनों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के दौरान राज्य की राजनीति एक स्थिर ढांचे में रही, लेकिन अब भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनने से नीतियों और प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल सकता है।