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बिहार शराबबंदी कानूनः 9 साल में 400 से अधिक मौत?, 14 लाख से अधिक लोग अरेस्ट, देखिए 2016-2025 आंकड़े

By एस पी सिन्हा | Updated: June 13, 2025 17:08 IST

Bihar liquor ban law: नौ सालों में अब तक 14 लाख से अधिक लोग शराब मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। करोड़ों लीटर शराब की जब्ती पुलिस ने की है।

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ठळक मुद्देपांच अप्रैल 2025 को इस शराबबंदी कानून के नौ साल पूरे हो गए।'संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों' की संख्या 266 है। सारण, गया, भोजपुर, बक्सर और गोपालगंज शामिल हैं।

पटनाः बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए 9 साल से ज्यादा के वक्त हो गए हैं। लेकिन शराबबंदी सूबे में कहर ढा रहा है। दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अप्रैल 2016 में शराबबंदी लागू की थी, जिसके बाद शराब के निर्माण और व्यापार पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। लेकिन इसके बावजूद बिहार में जहरीली शराब से मौतें और शराब तस्करी का खेल बदस्तूर जारी है। गैर आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य में जहरीली शराब पीने से अब तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि मद्य निषेध विभाग के आंकड़ों की मानें तो राज्य में शराबबंदी लागू होने के बाद अप्रैल 2025 तक जहरीली शराब से 190 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मद्य निषेध विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल नेने स्वीकार किया है कि अप्रैल 2016 में शराबबंदी के बाद से राज्य में अवैध शराब पीने से 190 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि नौ वर्षों में राज्य के विभिन्न हिस्सों से 'संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों' की संख्या 266 है। पांच अप्रैल 2025 को इस शराबबंदी कानून के नौ साल पूरे हो गए।

इन नौ सालों में अब तक 14 लाख से अधिक लोग शराब मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। करोड़ों लीटर शराब की जब्ती पुलिस ने की है। गुंजियाल ने कहा कि राज्य में सबसे अधिक जहरीली शराब से मौतों की रिपोर्ट जिन जिलों में हुई हैं, उनमें सारण, गया, भोजपुर, बक्सर और गोपालगंज शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि शराबबंदी के उल्लंघन पर अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2025 तक करीब 9.36 लाख मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 14.32 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जिनमें राज्य के बाहर के 234 लोगों सहित कुल 12.7 लाख लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है। अब तक 3.86 करोड़ लीटर शराब जब्त किया जा चुका है।

1.40 लाख से अधिक वाहनों को भी इस दौरान जब्त किया गया। 71,727 वाहनों की नीलामी से विभाग ने 327.13 करोड़ रुपये एकत्र किए गए। आंकड़े के अनुसार, अप्रैल 2016 से मार्च 2025 तक बिहार में 3 करोड़ 86 लाख 96 हजार 570 लीटर शराब धराए। इसमें 2.10 करोड़ लीटर विदेशी शराब मिले। इस दौरान तस्करों तक पहुंचने के लिए विभाग ने  33 खोजी कुत्तों की मदद ली।

हालांकि एनएफएचएस 5 की रिपोर्ट कहती है कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद यहां शहरी क्षेत्र के लोग महाराष्ट्र (शहरी) के लोगों के आसपास शराब गटक जाते हैं। इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शराबबंदी कानून को लेकर कहा कि जब भी जहरीली शराब से मौत होती है तो प्रशासन मौत के आंकड़ों को छुपाने में लगी रहती है।

कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती होती है। जब उनसे यह पूछा गया कि उनकी सरकार आने पर क्या शराब को शुरू करने की तैयारी है? इसपर उन्होंने कहा कि इस पर समीक्षा होगी और आगे जो निर्णय होगा उसे बताया जाएगा। तेजस्वी ने कहा कि नशा मुक्ति से कोई समझौता नहीं होगा। फिलहाल ताड़ी की बात की जा रही है।

ताड़ी के लिए पहले वाला कानून लाया जाएगा। पासी समाज कह रहा है कि निरा योजना पूरी तरह फ्लॉप है। ताड़ी को लेकर पुराना कानून लागू करेंगे। 2016 में बना कानून खत्म करेंगे। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद ने ताड़ी पर टैक्स खत्म किया था। हाई कोर्ट ने शराबबंदी पर बड़ा बयान दिया था। शराबबंदी पुलिस के लिए हथकंडा बन गया है। तस्करों के साथ पुलिस मिली हुई है।

शराबबंदी बिहार में फेल ही चुकी है। इसके पहले केन्द्रीय मंत्री एवं एनडीए के सहयोगी हम प्रमुख जीतन राम मांझी शराबबंदी का लगातार विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कई बार यह कहा है कि गरीब एक पौआ पी लेता है तो जेल भेज दिया जाता है, जबकि बडे-बडे लोग अधिकारी रोज शाम गुलजार करते हैं। ऐसे में सरकार को शराबबंदी कानून पर पुनर्विचार करना चाहिए।

वहीं, कांग्रेस विधायक प्रतिमा दास ने बिहार में शराबबंदी को लेकर कहा कि अगर बिहार में महागठबंधन की सरकार बनेगी तो बिहार में फिर से शराब की बिक्री शुरू होगी। उन्होंने कहा कि जैसे ठेका से शराब की बिक्री पहले होती थी। फिर से वैसे ही शराब की बिक्री होगी।

इसबीच बिहार में भाजपा कोटे से पर्यटन मंत्री राजू सिंह ने कहा कि शराबबंदी की वजह से बिहार का होटल व्यवसाय और फिल्म उद्योग क्षेत्र काफी प्रभावित हो रहा है। इन परेशानियों को दूर करने के लिए उनका विभाग प्रयास कर रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शराबबंदी से होटल और फिल्म उद्योग प्रभावित हो रहा है।

इस नीति के चलते इन लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर चर्चा करेंगे और गुजरात की तर्ज पर बिहार में भी शराबबंदी कानून में रियायत देने को लेकर अपनी बात रखेंगे।

टॅग्स :क्राइम न्यूज हिंदीBihar Policeनीतीश कुमारतेजस्वी यादव
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