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बिहार: जदयू के अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने राजद पर साधा निशाना, कहा-हमलोग किसी के पास दरखास लेकर नहीं...'

By स्वाति सिंह | Updated: January 3, 2021 16:09 IST

बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के बाद भारी उठापटक हो सकता है. एक ओर जहां नीतीश कैबिनेट विस्तार की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर चर्चा है कि उपेंद्र कुशवाहा अपने पार्टी रालोसपा का विलय जदयू में कर देंगे.

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ठळक मुद्देआरसीपी सिंह ने राजद की तरफ से मिल रहे ऑफर को रिजेक्ट कर दिया है. जदयू अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी अपने नेता के दम पर है और हमें किसी की ऑफर की कोई जरूरत नहीं हैबिहार में एनडीए की सरकार आए बिहार में लगभग दो महीने हो गए

पटना: बिहार में सियासी दलों के बीच चल रही ऑफर सियासत के बीच जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने राजद की तरफ से मिल रहे ऑफर को रिजेक्ट कर दिया है. जदयू अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी अपने नेता के दम पर है और हमें किसी की ऑफर की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि हमलोग किसी के पास दरखास लेकर नहीं खड़े हैं. हमारी अपनी ताकत है. हम अपनी ताकत के बदौलत आगे रहेंगे. जदयू को राजद की मदद की जरूरत नहीं है. 

आरसीपी सिंह ने सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित किया. इस दौरान कहा कि कोरोना संक्रमण के बीच कोरोना महामारी में नीतीश कुमार ने बेहतर काम किया. बिहार की तुलना अमेरिका से करते हुए कहा कि हमारे व्यवस्था अमेरिका से भी बढ़िया है. इधर, बिहार में एनडीए की सरकार आए बिहार में लगभग दो महीने हो गए और अब वैक्सीन को लेकर एक बार फिर चर्चा का बाजार गर्म है. 

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने कहा कि जो लोग कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर राजनीतिक रोटी सेक रहे हैं वो रोटी और पराठा सेंकते रहें. इसका कोई मतलब नहीं बतना है, क्योंकि कोरोना वायरस का न तो कोई धर्म है और न कोई राजनीतिक दल. यह बयान आरसीपी सिंह ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के उस बयान पर जवाब दिया है, जिसमें अखिलेश यादव कहा गया था कि वो कोरोना वैक्सीन को भाजपा का टीका मानते हैं और वो भाजपा का टीका नहीं लगवाएंगे. आरसीपी सिंह ने कहा कि जदयू के जो 7 निश्चय पार्ट 2 के घोषणा पत्र में कोरोना का टीका मुफ्त में देने की घोषणा पूरे बिहार के लोगों को जो कि गई है. उसे लेकर हमारी तैयारी है. कोरोना से लड़ने के लिए मुकम्मल व्यवस्था हमारी सरकार कर रही है. जिस से सभी को टीका लगे. 

उन्होंने कहा कि टीका लगाया जाता है रोग से लड़ने के लिए. इस में कोई जाति, कोई धर्म से लेना देना नहीं होता. कोई भी टीका वैज्ञानिक जांच के बाद तैयार होता है. कोरोना पर राजनीतिक रोटी या पराठा नहीं सेंकना चाहिए. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने एक बयान जारी कर देश वैज्ञानिकों को धन्यवाद दिया है. उन्होंने देश के तमाम वैज्ञानिकों को सलाम करते हुए कहा कि यह गौरव की बात है कि 1 साल के भीतर भारत में कोरोना की वैक्सीन बना ली और टीका लगना शुरू हो गया है. यहां बता दें कि  कोरोना वैक्सीन की मंजूरी मिलने के बाद टीकाकरण को लेकर शनिवार को बिहार में ड्राइ रन सफल रहा था. बिहार के तीन जिले पटना, बेतिया और जमुई में ड्राइ रन किया गया, जो सफल भी रहा. राजधानी में तीन जगहों दानापुर अनुमंडल अस्पताल, फुलवारीशरीफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं शास्त्रीनगर शहरी पीएचसी में में ड्राइ रन किया गया. ड्राइ रन के दौरान  स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर इसका जायजा लिया था. मंत्री की मौजूदगी में शास्त्रीनगर अस्पताल में एक हेल्थवर्कर उषा सिन्हा को डमी वैक्सीन का डोज दिया गया. मौके पर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार एवं सिविल सर्जन विभा कुमारी भी मौजूद थीं. कुल 225 लोगों पर ट्रायल किया गया.

इस बीच चर्चा है कि बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के बाद भारी उठापटक हो सकता है. एक ओर जहां नीतीश कैबिनेट विस्तार की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर चर्चा है कि उपेंद्र कुशवाहा अपने पार्टी रालोसपा का विलय जदयू में कर देंगे. इसको लेकर पूरी तैयारी भी की जा चुकी है. हालांकि अभी तक ना ही उपेंद्र कुशवाहा और ना ही जदयू की ओर से इसपर आधिकारिक पुष्टि आई है. सियासी गलियारों में चल रही चर्चा के मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा मकर संक्रांति के बाद नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में शामिल हो सकते हैं. वहीं उपेंद्र कुशवाहा राजद नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले जा रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा बिहार के चुनाव में एक भी सीट जीतने में असफल रही है. बिहार विधानसभा चुनाव में मनमुताबिक सफलता नहीं मिलने के कारण जदयू अब अगले चुनाव की तैयारी में जुट गई है. इसके कारण पार्टी बिहार में पिछड़े और अकलियत नेताओं को साधने में लगी है. पार्टी इसी रणनीति के तहत उपेंद्र कुशवाहा को अपने पार्टी में शामिल कराएगी. उपेंद्र कुशवाहा पूर्व में भी नीतीश के साथ रह चुके हैं. बताया जा रहा है कि राज्य में लोकसभा, विधानसभा व राज्यसभा की सभी सीटें भर गई हैं. ऐसे में सिर्फ विधान परिषद की 18 सीटें खाली हैं, जिनमें 12 मनोनयन कोटे की और दो विधानसभा कोटे की सीटें हैं. चार स्थानीय प्राधिकार कोटे की सीटें हैं, जिनके लिए अगले साल चुनाव होगा. ऐसे में चर्चा है कि उपेंद्र कुशवाहा को जदयू मनोयन कोटे से बिहार विधानपरिषद में भेज सकती है.

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