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बिहार: गया में सैंकड़ों महादलितों ने किया धर्मांतरण, हिंदू धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म अपनाया, बताई यह वजह

By एस पी सिन्हा | Updated: July 15, 2021 17:06 IST

बिहार के गया जिले में महादलित बस्ती में रहने वाले सैकड़ों महादलितों के द्वारा अपना धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म कबूल करने का मामला सामने आया है।

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ठळक मुद्देबिहार के गया जिले में महादलित बस्ती में रहने वाले सैकड़ों महादलितों ने ईसाई धर्म अपना लिया है। धर्मांतरण का यह मामला गया शहर के नगर प्रखंड के नैली पंचायत के बेलवादीह गांव का है। धर्मांतरण करने वाले लोगों ने कहा कि महादलित होने के कारण हिंदू मंदिरों में जाने पर रोक थी। 

बिहार के गया जिले में महादलित बस्ती में रहने वाले सैकड़ों महादलितों के द्वारा अपना धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म कबूल करने का मामला सामने आया है। धर्मांतरण का यह मामला गया शहर के नगर प्रखंड के नैली पंचायत के बेलवादीह गांव का है। 

बताया जाता है कि पहले इस महादलित बस्ती में सब कुछ ठीक से चल रहा था, लेकिन अचानक लोगो ने ईसाइयों की तरफ से आयोजित प्रार्थना में जाना शुरू कर दिया और फिर धीरे धीरे पूरी बस्ती ने धर्म परिवर्तन कर लिया। इस बस्ती में रहने वालों के मुताबिक एक महिला केवला देवी के बेटे की अचानक तबीयत खराब हो गई और बियत खराब हो गई और डॉक्टर से इलाज करा कर वह थक गई, लेकिन बेटे की तबीयत ठीक नहीं हुई। महिला को किसी ने ईसाई धर्म के लोगों के पास जाने की सलाह दी। ईसाई धर्म के कई लोग उसके गांव में पहुंचे घर पर प्रार्थना की और पवित्र जल दिया। 

उसके बाद महिला का बेटा ठीक हो गया। बस फिर क्या था महादलित परिवारों में ईसाई धर्म के प्रति रुचि बढती गई। लोग अपनी परेशानी को लेकर वहां जाने लगे। जिनकी परेशानी दूर हुई उनकी आस्था ईसाई धर्म में बढती गई। 

वहीं जानकार बताते हैं कि पास के ही गांव वाजिदपुर में रविवार को ईसाई धर्म के द्वारा प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाता था। उसी प्रार्थना में सभी महादलित महिला-पुरुष शामिल हुए और हिन्दू धर्म को त्याग कर ईसाई धर्म को अपना लिया। धर्म परिवर्तन कर चुकी महिलाएं बताती हैं कि ईसाई धर्म मे महिला को सिंदूर नही लगाना है। उसके बाद महादलित महिलाओं ने उसका पालन कर सिंदूर लगाना भी बंद कर दिया है। महिलाओं ने कहा कि प्रार्थना में जब जाते हैं तो स्नान कर बिना श्रृंगार और सिंदूर के जाती हैं। उसके बाद अन्य दिन वह सिंदूर भी लगाती हैं। 

वहीं लोगों ने कहा कि किसी ने लालच या किसी ने जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन के लिए बाध्य नही किया है बल्कि स्वेच्छा से हिन्दू धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म को अपनाया है। उन लोगों ने बताया कि उन्होंने अब पूजा पाठ भी बन्द कर दिया है। गांव के धर्म परिवर्तन कर चुके महादलित पुरुष मनोज मांझी ने बताया कि हमलोग बहुत परेशान थे कभी बेटा तो कभी बेटी का तबियत खराब रहता था। मगर इस धर्म में आने के बाद सब कुछ ठीक हो गया है। महादलित होने के कारण कई हिन्दू मंदिरों में जाने पर रोक थी, लेकिन ईसाई धर्म में ऐसा कुछ नहीं है। पहले भी मंदिर में पूजा पाठ नही करते थे। अब भी नहीं करते हैं।

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