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बिहार सरकार ने लिया अक्षम कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने का फैसला, आरजेडी ने साधा निशाना

By एस पी सिन्हा | Updated: January 28, 2021 16:06 IST

बिहार सरकार ने सरकारी विभागों में 50 साल से ज्यादा उम्र वाले अक्षम कर्मचारियों को निकालने के अपने फैसले पर काम करना शुरू कर दिया है...

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ठळक मुद्देबिहार सरकार ने कर्मचारियों के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए पॉलिसी बनाई।50 से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों की नौकरी पर लटकी तलवार।जबरन रिटायर करने की कवायद।

बिहार सरकार ने 50 वर्ष से ज्यादा के कर्मी जिनकी कार्य दक्षता ठीक नहीं है, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया है. इस आलोक में गृह विभाग ने वैसे अधिकारियों-कर्मियों के कार्यों की समीक्षा को लेकर कमेटी का गठन किया है. गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. इस आदेश से वैसे पुलिस कर्मियों के मुसीबत खड़ी हो गई है, जो काम करने में सक्षम नहीं हैं. अब उन्हें जबरन रिटायर किया जाएगा. सरकार के इस निर्णय के बाद एक फिर से बिहार में राजनीति शुरू हो गई है. राजद ने इस पर सवाल खडे किये हैं. 

कर्मचारियों को साल में दो बार खुद को साबित

ऐसे में अब उन्‍हें रिटायरमेंट की उम्र तक नौकरी करने के लिए खुद को काम के लायक बनाए रखना होगा और इसे हर साल दो बार साबित भी करना होगा. अगर वे ऐसा करने में सक्षम नहीं रहे तो सरकार उन्‍हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भेज देगी. गृह विभाग की कारा इकाई में अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक के क्षमता मूल्यांकन के लिए कमेटी का गठन किया गया है. 

गृह विभाग का आदेश

गृह विभाग के आदेश में कहा गया है कि वैसे सरकारी सेवक जिनकी उम्र 50 वर्ष से ज्यादा हो चुकी हो. जिनकी कार्य दक्षता या आचार ऐसा नहीं हो, जिससे उन्हें सेवा में बनाए रखने का निर्णय लोकहित में हो. वैसे सरकारी सेवकों के कार्यो की समीक्षा कर बिहार सेवा संहिता के नियम 74 (क) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्त किए जाने की अनुशंसा को लेकर कमेटी का गठन किया जाता है.

समूह ’ए’ के सरकारी सेवकों के कार्यकलापों की समीक्षा को लेकर अपर मुख्य सचिव गृह विभाग को अध्यक्ष बनाया गया है. जबकि सदस्य में सचिव गृह विभाग, विशेष सचिव गृह विभाग और विभागीय मुख्य निगरानी पदाधिकारी होंगे. वहीं समूह बी, सी एवं अवर्गीकृत सरकारी सेवकों के कार्य की समीक्षा को लेकर विभाग के सचिव को अध्यक्ष, मुख्य निगरानी पदाधिकारी और अवर सचिव गृह विभाग को सदस्य नामित किया गया है.

इस प्रकार से समिति की बैठक प्रत्येक वर्ष जून एवं दिसंबर माह में आहूत की जाएगी, जिसमें सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प के प्रावधानों के आलोक में समीक्षा कर निर्णय लिया जाएगा. कमेटी अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों की रिपोर्ट तैयार करेगी. इसके बाद काम नहीं करने वाले अधिकारियों व कर्मियों को हटाये जाने की कार्रवाई शुरू होगी. कारा इकाई में इसके लिए तीन तरह की कमेटियां बनी हैं. वर्ग क के लिए गृह विभाग अपर मुख्य सचिव अध्यक्षता में कमेटी बनी है. इसमें कारा एवं सुधार सेवाओं को आइजी को सदस्य, संयुक्त सचिव सह निदेशक को सदस्य सचिव और विधि पदाधिकारी को सदस्य बनाया गया है. इनके अलावा संयुक्त सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी वर्ग ख के अधिकारियों के लिए बनी है, जबकि उपसचिव स्तर की अध्यक्षता वाली कमेटी कर्मचारियों के कार्य मूल्यांकन के लिए बनी है. उल्लेखनीय है कि पूर्व में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से प्रशासन के सुदृढीकरण के लिए सरकारी सेवकों के कार्यकलापों की समीक्षा के लिए आदेश जारी किये गये थे. उसी के आलोक में अन्य विभागों से भी आदेश निकाले जा रहे हैं.

राजद प्रवक्ता मनोज झा ने बताया 'तुगलकी फरमान'

ऐसे में राजद के राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने कहा है कि ये उस राज्य का 'तुगलकी फरमान' है, जहां एक बडी आबादी को 40 से 45 वर्ष की उम्र में एक अदद नौकरी बडी मुश्किल से मिलती है और हां!' अक्षमता' अगर पैमाना हो तो 'शासनादेश' से उत्पन्न इस सरकार को ही रिटायर हो जाना चाहिए. गृह विभाग द्वारा 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के कर्मी जिनकी कार्य दक्षता संतोषजनक नहीं है, उन्हें बिहार सरकार ने जबरिया रिटायर करने का फैसला लिया है. सरकार के इस फैसले के बाद 50 से ज्यादा उम्र के कर्मियों की चिंता बढ चुकी है तो वहीं इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है. बिहार की राजनीति में अब रिटायरमेंट को लेकर तनातनी हो रही है.

टॅग्स :नीतीश कुमारबिहारआरजेडी
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