बिहार चुनावः 2026 में 17 सीट खाली, राज्यसभा के बाद MLC इलेक्शन में भी तेजस्वी यादव को लगेगा झटका, 1 सीट के लिए 25 विधायक?
By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 2, 2026 16:44 IST2026-04-02T16:42:07+5:302026-04-02T16:44:06+5:30
Bihar Elections: बिहार विधान परिषद के आंकड़ों को देखें तो भाजपा 22, जदूय 19, हम 1, राजद 16, कांग्रेस 3, भाकपा (माले) 1 और भाकपा 1 सीट पर है।

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पटनाः बिहार की सियासत में इन दिनों लगातार जारी हलचलों के बीच अब बिहार विधान परिषद की खाली हो रही सीटों को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ने लगी है। बता दें कि 30 मार्च को ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। दरअसल, विधान परिषद की 9 सीटें 28 जून 2026 को खाली होंगी। जबकि 8 सीटें नवंबर 2026 में खाली होंगी। ऐसे में कुल 17 सीटों के लिए सियासी जंग इस साल जारी रहेगी। फिलहाल राज्य में कुल 11 सीटों पर होने वाला यह चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जा रहा है। वर्तमान दलीय विधायकों की संख्यात्मक स्थित के अनुसार बिहार विधान परिषद चुनाव में एक उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसा नौ सीटों के चुनाव के आधार पर होगा।
Bihar Elections: आंकड़ों के लिहाज से 11 में से करीब 10 सीटें एनडीए के खाते में जाती दिख रही
दो उप चुनाव वाली सीटों का अलग आधार है। इस चुनाव ने न सिर्फ पटना बल्कि दिल्ली तक राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। फिलहाल बिहार विधान परिषद के आंकड़ों को देखें तो भाजपा 22, जदूय 19, हम 1, राजद 16, कांग्रेस 3, भाकपा (माले) 1 और भाकपा 1 सीट पर है।
इसके अलावा पशुपति पारस की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के पास 1, जनसुराज 1 और निर्दलीय 6 सीटों पर काबिज हैं। ऐसे में आगामी होने वाले चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए इस चुनाव में मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। आंकड़ों के लिहाज से 11 में से करीब 10 सीटें एनडीए के खाते में जाती दिख रही हैं।
Bihar Elections: जदयू कोटे से खाली सीट (नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद) पर उपचुनाव भी होना है।
विधान परिषद चुनाव के लिए लोजपा (रामविलास) प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी भी एक सीट पर दावा ठोक रही है। राज्यसभा चुनाव में अपने 19 विधायकों के समर्थन के बदले पार्टी विधान परिषद सीट चाहती है। वहीं, भाजपा कोटे से खाली हुई सीट (मंगल पांडेय के इस्तीफे के बाद) और जदयू कोटे से खाली सीट (नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद) पर उपचुनाव भी होना है।
वही, विपक्षी महागठबंधन संख्या बल के मामले में कमजोर स्थिति में है। एक सीट जीतने के लिए 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है, जबकि महागठबंधन के पास एआईएमआईएम और बसपा को मिलाकर कुल 41 विधायक हैं। इस गणित के अनुसार महागठबंधन सिर्फ एक सीट ही आसानी से जीत सकता है।
Bihar Elections: राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भाजपा और जदयू के हिस्से 4-4 सीटें आ सकती हैं
दूसरी सीट के लिए उसे 9 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि तेजस्वी यादव की पार्टी राजद अपनी सीट पर खुद उम्मीदवार उतारेगी या फिर एआईएमआईएम को समर्थन देगी। जिन नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें राजद के सुनील कुमार सिंह और मोहम्मद फारूक, जदयू के गुलाम गौस, भीष्म सहनी और कुमुद वर्मा, भाजपा के संजय मयूख और कांग्रेस के समीर कुमार सिंह शामिल हैं। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भाजपा और जदयू के हिस्से 4-4 सीटें आ सकती हैं।
Bihar Elections: ताकत, एकजुटता और रणनीतिक कौशल की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है
वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी और चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) को 1-1 सीट मिलने की संभावना है। लेकिन राजद को अपनी मौजूदा दो सीटों में से एक गंवानी पड़ सकती है। कुल मिलाकर, यह चुनाव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ताकत, एकजुटता और रणनीतिक कौशल की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
ऐसे में सियासत के जानकारों का मानना है कि बिहार विधान परिषद का यह चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ताकत और रणनीति की भी परीक्षा है। जहां सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगा, वहीं विपक्ष के लिए यह अपनी एकजुटता और राजनीतिक कौशल साबित करने का मौका होगा।