राहत की खबर, बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे?
By एस पी सिन्हा | Updated: February 21, 2026 16:29 IST2026-02-21T16:27:20+5:302026-02-21T16:29:12+5:30
रजिस्ट्रार, जन्म एवं मृत्यु निबंधन की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अस्पतालों में समय पर जन्म प्रमाण पत्र बनना सुनिश्चित किया जाए।

सांकेतिक फोटो
पटनाः बिहार में अब बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब प्रसव के बाद जन्म प्रमाण पत्र अस्पताल से ही देने की व्यवस्था की जा रही है। बिहार के सदर अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों में मां को डिस्चार्ज करने से पहले ही नवजात का जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर दिया जाएगा। ऐसे में अस्पताल से घर आने से पहले आपको बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट मिल जाएगा। स्वास्थ्य विभाग, बिहार को मिले निर्देश के बाद सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने सभी अस्पताल प्रभारियों को आदेश जारी किया है कि किसी भी महिला को डिस्चार्ज करने से पूर्व उसके बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनाना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रार, जन्म एवं मृत्यु निबंधन की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अस्पतालों में समय पर जन्म प्रमाण पत्र बनना सुनिश्चित किया जाए।
इसके तहत अब प्रसव के तुरंत बाद अस्पताल में ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। साथ ही, प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं और उनके परिजनों को जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया और उसके महत्व के बारे में जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अब तक माता-पिता को बच्चे के नामकरण के बाद अस्पताल या संबंधित कार्यालय जाकर प्रमाण पत्र बनवाना पड़ता था।
कई बार पोर्टल की धीमी गति या सर्वर की तकनीकी समस्याओं के कारण 3-4 दिन तक चक्कर लगाने पड़ते थे। नई व्यवस्था से न केवल अभिभावकों को राहत मिलेगी, बल्कि जन्म निबंधन प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और त्वरित होगी। वर्तमान समय में जन्म प्रमाण पत्र का महत्व काफी बढ़ गया है।
स्कूल में नामांकन, सरकारी योजनाओं का लाभ, आधार कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के लिए यह अनिवार्य हो चुका है। ऐसे में अस्पताल से ही प्रमाण पत्र उपलब्ध होने से आम लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी। बता दें कि आज के समय में जन्म प्रमाण पत्र बहुत जरूरी दस्तावेज है।
स्कूल में एडमिशन, सरकारी योजनाओं, आधार कार्ड और अन्य कागजात के लिए यह अनिवार्य है। पहले नामकरण के बाद माता-पिता को फिर अस्पताल या कार्यालय जाना पड़ता था। नई व्यवस्था से इन परेशानियों से राहत मिलेगी।