शराबबंदी कानून से नुकसान, नीतीश सरकार के सहयोगी पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी बोले-केवल गरीब परेशान

By एस पी सिन्हा | Updated: December 9, 2021 19:07 IST2021-12-09T19:06:11+5:302021-12-09T19:07:03+5:30

नीतीश सरकार में सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने राज्य में शराबबंदी के नीतीश सरकार के निर्णय पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम ने सवाल उठाया है. 

Bihar cm nitish kumar former Chief Minister Jitan Ram Manjhi liquor prohibition law government only poor are troubled | शराबबंदी कानून से नुकसान, नीतीश सरकार के सहयोगी पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी बोले-केवल गरीब परेशान

वह गरीब तबके के लोग हैं. शराब तस्करी के जो बडे़ खिलाड़ी हैं, वे पकड़ के बाहर रहते हैं.

Highlightsशराबबंदी के फैसले पर एक बार फिर समीक्षा करनी चाहिए. राज्य को काफी नुकसान हो रहा है.पूर्व मुख्यमंत्री ने बिना लाग लपेट के कहा कि शराबबंदी कानून से बेहतर साल 1991 का पुराना कानून था.

पटनाः बिहार में शराबबंदी कानून को पहले से ज्यादा सख्त तरीके से लागू कराने के लिए एक ओर जहां नीतीश सरकार कमर कसी हुई है तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष लगातार शराबबंदी कानून की समीक्षा की जरूरत बता रहा है.

 

अब नीतीश सरकार की सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने राज्य में शराबबंदी के नीतीश सरकार के निर्णय पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम ने सवाल उठाया है. जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सुझाव दिया है कि उन्हें शराबबंदी के फैसले पर एक बार फिर समीक्षा करनी चाहिए. उन्होंने शराबबंदी के निर्णय की खामियां गिनाई.

मांझी ने कहा कि राज्य में जो मौजूदा शराब बंदी कानून लागू है, उसे राज्य को काफी नुकसान हो रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री ने बिना लाग लपेट के कहा कि शराबबंदी कानून से बेहतर साल 1991 का पुराना कानून था. उन्होंने कहा कि हम शुरुआती दौर से ही कहा रहे हैं कि शराबबंदी कानून से जिस पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, वह गरीब तबके के लोग हैं. शराब तस्करी के जो बडे़ खिलाड़ी हैं, वे पकड़ के बाहर रहते हैं.

जबकि गरीब लोग परेशान होते हैं. उन्होंने नीतीश कुमार का नाम लिए बिना कहा कि हमारी अपील है कि छोटी मछली को नहीं बल्कि बड़ी मछली को पकड़ें. राज्य में नए शराबबंदी कानून के लागू होने के बाद राज्य को हुए नुकसान की गिनती मांझी ने कराई है. उन्होंने कहा है कि आज बिहार में होटल उद्योग पूरी तरीके से चौपट हो चुका है. पर्यटन व्यवसाय का हाल बेहद बुरा है.

गया जैसी जगह पर जहां पहले पर्यटक बड़ी संख्या में आते थे, अब वह गया आने की बजाय कोलकाता चले जाते हैं. जो होटल कारोबारी गया में पर्यटक के आकर्षण के कारण कारोबार कर रहे थे, उनकी हालत पतली हो गई है. सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है. इतना ही नहीं मांझी ने यह भी कहा कि बिहार में जिस तरह शराबबंदी लागू की गई है, उसके कारण अब अवैध कारोबार के नए नेटवर्क को खडा होने में मदद मिली है. मांझी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सरकार को तत्काल शराबबंदी कानून की समीक्षा करनी चाहिए.

ऐसी शराबबंदी का क्या फायदा जब इससे राज्य को नुकसान हो रहा हो? जीतन राम मांझी ने यहां तक कहा कि अगर दवा के रूप में शराब का सेवन किया जाए तो वह हानिकारक नहीं बल्कि फायदेमंद ही है. शराबबंदी को सफल बनाने के लिए प्रशासन जरूरत से ज्यादा तत्पर है और किसी भी चीज की अति खराब होती है. इसलिए शराबबंदी के फैसले पर एक बार फिर समीक्षा करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बदले अगर शराब का सेवन रोकना है तो लोगों में जागरूकता फैलाएं. जब तक जागरूकता नहीं फैलेगी, तब तक शराब बंदी सफल नहीं हो सकता है. कितना भी कानून बना लीजिए या कडाई कर लें, जो लोग शराब के आदी हो चुके हैं, जो लोग सोच कर बैठे है वे तो शराब पीएंगे ही, चाहे कुछ भी कर लीजिए.

गुजरात के शराबबंदी नियम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हम अपील करते हैं कि नीतीश कुमार बिहार में शराबबंदी कानून पर समीक्षा करें. पुलिस शराब के पीछे ही लगी हुई है, लेकिन राज्य में कई और मुद्दे हैं. शराबबंदी को ही प्राथमिकता देने से बेहतर है कि केंद्र से या अन्य माध्यमों से ज्यादा से ज्यादा मदद लेकर बिहार के विकास पर ध्यान दिया जाये. 

उन्होंने कहा कि 1991 के शराबबंदी कानून में भी यह बात स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कोई व्यक्ति शराब पीकर सार्वजनिक जगह पर बवाल या हंगामा नहीं कर सकता. सडक पर अगर कोई शराबी उपद्रव करता है तो उसके खिलाफ पुराने कानून के तहत भी कार्रवाई किया जा सकता है. लेकिन शराबबंदी कानून के दायरे में केवल गरीब लोग आ रहे हैं.

मांझी ने कहा कि कुछ लोगों को पीने की छूट जरुर मिलनी चाहिए. गरीब आदमी अगर दिन भर मजदूरी करने के बाद एक ग्लास दूध खरीद कर पीने में सक्षम नहीं है तो वह ढाई सौ मिली लीटर शराब लेकर अपनी थकावट दूर करता था. लेकिन अब वह जैसे ही शराब पीता है, उसे जेल में डाल दिया जाता है.

इतना ही नहीं जीतन राम मांझी ने यह भी कहा कि बिहार में सेना के लोगों को भी शराब पीने पर जेल भेज दिया जाता है जो सही नहीं है. सेना के लोगों के कल्चर में ही वाइन है. लेकिन बिहार का शराबबंदी कानून इसकी इजाजत नहीं देता है.

इसके अलावा पर्यटक जो बिहार आते हैं उन्हें भी शराब पीने पर जेल भेज दिया जाता है जो ठीक नहीं है. मांझी ने कहा कि शराबबंदी कानून को व्यवहारिक बनाए जाने की जरूरत है. उन्होंने इतना जरूर कहा कि वह शराबबंदी कानून का विरोध नहीं कर रहे लेकिन उनका मानना है कि पुराना कानून ही बेहतर था.

Web Title: Bihar cm nitish kumar former Chief Minister Jitan Ram Manjhi liquor prohibition law government only poor are troubled

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