Bihar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली रवाना होने से ठीक पहले बुधवार को 4954 नवनियुक्त एएनएम (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता) को नियुक्ति पत्र सौंपा। पटना के शास्त्रीनगर स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से तब गूंज उठा जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चयनित महिला अभ्यर्थियों को मंच पर बुलाकर नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस मौके पर दोनों उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी मौजूद थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त एएनएम को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए एक मंत्र भी दिया।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ एक नौकरी नहीं बल्कि मानवता की सेवा है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि सभी एएनएम पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल करेंगी। इस नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने विभाग की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड समय में इन नियुक्तियों को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता रही है।
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस मौके पर शिरकत की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राज्य सरकार अब स्वास्थ्य और रोजगार को विकास के केंद्र बिंदु में रखकर काम कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये नियुक्तियां लंबे समय से लंबित प्रक्रिया का हिस्सा थीं, जिन्हें अब पूरा किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य राज्य के हर हिस्से में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना और खासकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करना है। एएनएम को स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ये टीकाकरण, प्रसव सेवाओं और प्राथमिक उपचार जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में एएनएम की नियुक्ति को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अहम सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार की इस पहल से जहां हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं भी जमीनी स्तर पर मजबूत होंगी। यह केवल सरकारी नौकरी का वितरण नहीं था, बल्कि सुदूर गांवों तक ‘इलाज और एहतियात’ का भरोसा पहुंचाने की एक मुहिम है। एक साथ 4954 एएनएम की तैनाती से बिहार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और उपकेंद्रों की तस्वीर बदलने वाली है।
इस नियुक्ति से विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार आएगा। टीकाकरण अभियान से लेकर प्रसव पूर्व देखभाल तक, अब सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी नर्सों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे न केवल बड़े अस्पतालों पर मरीजों का बोझ कम होगा, बल्कि मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिलेगी।