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बिहार विधानसभा में 2.11 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश, पहली बार ग्रीन BUDGET, सड़क, पानी और शिक्षा पर फोकस

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 25, 2020 20:48 IST

बिहार विधानसभा में बजट पेश करने के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए सुशील मोदी ने बताया, “वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 2,11,761.49 करोड़ रुपये का बजट है, जो 2019-20 के 2,00,501 करोड़ रुपये से 11,260.48 करोड़ रुपये अधिक है।”

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ठळक मुद्देयह 19,172 करोड़ रुपये के राजस्व अधिशेष वाला बजट है।सबसे अधिक 35,191 करोड़ रुपये का प्रावधान शिक्षा क्षेत्र के लिए किया गया है।

बिहार विधानसभा में मंगलवार को उपमुख्यमंत्री तथा वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राज्य सरकार का 2.11 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया।

बजट में 19,172 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष (रेवन्यू सरप्लस) है और इसमें शिक्षा के लिए सबसे अधिक करीब 35,000 करोड रुपये का प्रावधान किया गया है। बिहार विधानसभा में बजट पेश करने के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए सुशील मोदी ने बताया, “वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 2,11,761.49 करोड़ रुपये का बजट है, जो 2019-20 के 2,00,501 करोड़ रुपये से 11,260.48 करोड़ रुपये अधिक है।”

उन्होंने बताया कि यह 19,172 करोड़ रुपये के राजस्व अधिशेष वाला बजट है और इसमें सबसे अधिक 35,191 करोड़ रुपये का प्रावधान शिक्षा क्षेत्र के लिए किया गया है। सुशील मोदी ने कहा कि इस बजट में 20,374 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अनुमान है।

उन्होंने कहा “हम राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को तीन प्रतिशत की सीमा के भीतर 2.81 प्रतिशत पर रखने में सफल रहे हैं।” उन्होंने बताया कि इस बजट में सड़क के लिए 17345 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य के लिए 10,937.68 करोड़ रुपये तथा एससी, एसटी, अल्पसंख्यक, ओबीसी और एमबीसी के कल्याण के लिए 11,911.38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने घोषणा की कि मार्च 2020 के अंत तक बिहार के सभी घरों में पाइपलाइन से पेयजल पहुंचने लगेगा, हर घर पक्की सड़क से जुड़ा होगा और जल निकासी की व्यवस्था होगी। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बजट को पूरी तरह दिशाहीन बताते हुए आरोप लगाया कि बजट में दूरदर्शिता का अभाव है, बिहार के सात करोड़ युवाओं को रोजगार देने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा की गुणवता सुधारने तथा नियोजित शिक्षकों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। 

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