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बिहार के साथ 54 सीटों पर उपचुनाव, मध्य प्रदेश में कांग्रेस-भाजपा के बीच मूंछ की लड़ाई

By शीलेष शर्मा | Updated: October 29, 2020 19:50 IST

मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है। दरअसल विधायकों के पाला बदलने के कारण राज्य में कमल नाथ सरकार को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी, जिसके लिये कांग्रेस ज्योतिरादित्य को खलनायक के रूप में चिन्हित कर चुकी है।

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ठळक मुद्देकांग्रेस ने ग्वालियर संभाग में सिंधिया को शिकस्त देने के लिये अपनी ताक़त झोंक दी है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री सुनील केदार अपने पार्टी  समर्थकों के साथ ग्वालियर में डेरा डाले हुये हैं।लोगों में इस बात को लेकर नाराज़गी है कि सिंधिया को कांग्रेस ने सब कुछ दिया फ़िर भी उन्होंने पार्टी से दगा किया।

नई दिल्लीः बिहार चुनाव की गूंज में भले ही राज्यों की विधान सभाओं के उप चुनावों का शोर सुनाई न दे रहा हो लेकिन राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव मूंछ का सवाल बने हुये हैं।

देश के विभिन्न 11  राज्यों के  54 विधान सभा सीटों पर हो रहे उप चुनावों में मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है। दरअसल विधायकों के पाला बदलने के कारण राज्य में कमल नाथ सरकार को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी, जिसके लिये कांग्रेस ज्योतिरादित्य को खलनायक के रूप में चिन्हित कर चुकी है।

यही कारण है कि कांग्रेस ने ग्वालियर संभाग में सिंधिया को शिकस्त देने के लिये अपनी ताक़त झोंक दी है। सूत्रों से मिली खबरों के अनुसार इस क्षेत्र की 9 सीटों के लिये महाराष्ट्र सरकार में मंत्री सुनील केदार अपने पार्टी  समर्थकों के साथ ग्वालियर में डेरा डाले हुये हैं।

सुनील केदार ने दावा किया कि इस संभाग में कांग्रेस सभी सीटों पर सिंधिया को पराजय का स्वाद चखायेगी क्योंकि लोगों में इस बात को लेकर नाराज़गी है कि सिंधिया को कांग्रेस ने सब कुछ दिया फ़िर भी उन्होंने पार्टी से दगा किया। जिन राज्यों में उप चुनाव हो रहे हैं उनमें कर्नाटक में 2, छत्तीसगढ़ में एक, गुजरात में 8, हरियाणा में 1, झारखंड में 2, मणिपुर में 2 , मध्य प्रदेश में 28, नागालैंड में 2, तेलंगाना में एक,ओडिशा में 2, उत्तर प्रदेश में 7 सीटें शामिल हैं।  

मध्य प्रदेश में भोपाल की 2 सीट , मालवा की 5 ,चंबल की 7 ,बुंदेलखंड की 2 ,निमाड़ की 2 और महाकौशल की एक सीट शामिल है। कमलनाथ, दिग्विजय, सचिन पायलट कांग्रेस की जीत के लिये जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं जबकि शिवराज सिंह के सामने जीने -मरने का सवाल खड़ा है नतीजा मुख्यमंत्री शिवराज और सिंधिया अपनी साख बचाने के लिये अपने दल-बल  के साथ कोशिश कर रहे हैं। 

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