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NFHS-5 Report: केंद्र की रिपोर्ट से खुली बिहार में शराबबंदी की पोल, 15 फीसदी लोग छलका रहे हैं जाम, महिलाएं भी पीछे नहीं

By एस पी सिन्हा | Updated: December 13, 2020 15:46 IST

बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है. इसके बावजूद शराब का इस्तेमाल खूब हो रहा है. केंद्र सरकार के पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) में ये बात सामने आई है.

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ठळक मुद्देबिहार में शराबबंदी के दावों पर सवाल, NFHS-5 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 15 फीसदी पी रहे हैं शराबरिपोर्ट के अनुसार बिहार के शहरी इलाके में 0.5 प्रतिशत तो गांव में 0.4 प्रतिशत महिलाएं भी पी रही हैं शराब NFHS-5 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में नवजात शिशु मृत्युदर में कमी आई है, प्रजनन दर में भी कमी

पटना:बिहार में शराबबंदी का कानून लागू है और मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार इसे लेकर गंभीरता जताते रहे हैं. हालांकि, बिहार में शराबबंदी को लेकर नीतीश कुमार के दावों की पोल केंद्र सरकार ने ही खोल दी है. 

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बिहार के 15 फीसदी लोग शराब पी रहे हैं. यहां तक कि नाबालिग भी शराब पी रहे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने रविवार को 5वें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) जारी किया, जिसमें देश के 22 राज्यों में जनसंख्या, स्वास्थ्य और पोषण के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है. 

बिहार में शराब से लेकर खैनी और पान-गुटखे का सेवन

रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में आज भी 15 प्रतिशत लोग शराब का सेवन कर रहे हैं. बिहार के 48 फीसदी लोग खैनी से लेकर पान-गुटखे के रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं. केंद्र सरकार के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में कहा गया है कि बिहार में शहर से लेकर गांव के लोग शराब पी रहे हैं. 

हालांकि गांवों में शराब पीने वालों की तादाद शहरी लोगों की तुलना में ज्यादा है. सर्वे में आई ज्यादा चिंताजनक बात ये है कि बड़े पैमाने पर नाबालिग भी शराब का सेवन कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 15 फीसदी से ज्यादा नाबालिग शराब पी रहे हैं. 

15 साल की उम्र या उससे ज्यादा उम्र के शराब पीने वालों की संख्या शहरों में 14 प्रतिशत है. जबकि बिहार के ग्रामीण इलाके में 15 वर्ष से ऊपर के शराब पीने वालों की संख्या 15.8 प्रतिशत है. 

वैसे, पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य में 15 फीसदी लोग कहां से शराब पी रहे हैं, ये सरकार ही बेहतर बता पायेगी. नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-5 (एनएफएचएस-5) के पहले फेज की साल 2019-20 की रिपोर्ट के अनुसार राज्‍य के 48 फीसद पुरुष तो 5 फीसद महिलाएं तंबाकू का सेवन करतीं हैं. 

देश के 22 प्रदेशों में 35834 घरों के सर्वे के आधार पर बनाई गई इस रिपोर्ट में तैयार में बिहार के विकास को दर्शातीं बेहतर आंकड़े भी शामिल हैं.

महिलाएं भी पी रही हैं शराब

एनएफएसएस की रिपोर्ट के अनुसार शहरी इलाकों की अपेक्षा गांवों में शराब अधिक पी जा रही है. इसका कारण शहरी इलाकों में अधिक जागरूकता व पुलिस सक्रियता को जाता है. जबकि सुदूर ग्रामीण इलाकों में पुलिस सक्रियता की कमी होती है. 

इसका असर शराबबंदी कानून के पालन पर भी पड़ा है. सर्वे की रिपोर्ट में महिलाओं को लेकर भी चौंकाने वाली बात कही गी है. रिपोर्ट के मुताबिक बिहार की कई महिलायएं भी शराब की शौकीन हैं. बिहार के शहरी इलाके में 0.5 प्रतिशत महिलाएं शराब पी रही हैं. 

वहीं ग्रामीण इलाकों में 0.4 प्रतिशत महिलाएं जाम छलका रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बिहार की 15 वर्ष से अधिक उम्र की कुल 5 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का इस्तेमाल कर रही हैं. 

बिहार में तंबाकू का भी खूब हो रहा सेवन

रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में शहर की 3.6 प्रतिशत और गांव की 5.3 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं. वहीं, पुरुषों की बात करें तो 15 साल से ज्यादा उम्र के 48.8 प्रतिशत लोग खैनी, पान-गुटखा, सिगरेट या दूसरे तरीके से तंबाकू का सेवन कर रहे हैं. 

शहरों से ज्यादा ग्रामीण इलाके में लोग तंबाकू का सेवन कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार बिहार में लगभग हर दूसरा आदमी तंबाकू का सेवन कर रहा है. प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में 15 साल से अधिक आयु के करीब 50.7 फीसद लोग तंबाकू का किसी ना किसी रूप में सेवन करते हैं. 

शहरों में यह तादाद 40.3 फीसद है. रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र ग्रामीण हो या फिर शहरी, महिलाएं अब घरों के फैसले लेने में सहभागी बन रही हैं. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 87 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 84 फीसद शादी-शुदा महिलाएं घर में फैसले लेने में मददगार बन रही हैं. 

18 साल से कम उम्र में भी हो रही शादी

रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर अब भी तकरीबन 40.8 फीसद बच्चियों की शादी 18 से कम आयु में कर दी गई. ग्रामीण क्षेत्रों में 43.4 फीसद और शहरी क्षेत्र में 27.9 फीसद महिलाओं का विवाह 18 से कम साल की आयु में किया गया. 

यह सर्वे 20-24 आयु वर्ग की महिलाओं के बीच किए गए. रिपोर्ट को मानें तो बिहार में पूर्व की अपेक्षा नवजात शिशु मृत्युदर में कमी आई है. 2015-16 में नवजात मृत्युदर 36.7 फीसद थी, जो 2019-20 में घटकर 34.5 फीसद हो गई है. 

शहरी क्षेत्र में जहां यह मृत्युदर 29.5 फीसद है तो ग्रामीण क्षेत्रों में थोडी अधिक 35.2 फीसद के करीब है. इसके अलावा बिहार में 11 फीसद महिलाएं ऐसी हैं, जो 15 से 19 वर्ष के बीच मां बनी. इसमें 11.6 फीसद ग्रामीण, जबकि 7.4 फीसद शहरी महिलाएं शामिल हैं. हालांकि 2015-16 की अपेक्षा इसमें 1.2 फीसद की कमी आई है.  

परिवार नियोजन कार्यक्रमों का भी दिख रहा असर

बिहार में परिवार नियोजन का असर भी सर्वे रिपोर्ट में देखने को मिला है. रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 की अपेक्षा 2019-20 में प्रजनन दर में कमी दर्ज की गई है. 2015-16 में जहां प्रजनन दर प्रति महिला 3.4 थी, वह 2019-20 में घटकर ग्रामीण क्षेत्रों में 3.1 तो शहरी क्षेत्र में 2.4 हो गई. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में 18-49 आयु वर्ग की 40 फीसद महिलाएं पतियों की प्रताड़ना का शिकार हुई हैं. 

हालांकि 2015-16 में ऐसे मामलों की संख्या 43.7 फीसद के करीब थी. सर्वे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 18-49 आयु वर्ग की 39.9 फीसद तो शहरी क्षेत्र में 40.6 फीसद महिलाएं पतियों की प्रताड़ना का शिकार हुईं हैं. 

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