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चक्रवात ‘गुलाब’ के आने से पहले ओड़िशा में बारिश शुरू, लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान जारी

By भाषा | Updated: September 26, 2021 16:59 IST

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भुवनेश्वर, 26 सितंबर ओड़िशा में चक्रवात ‘गुलाब’ के दस्तक देने से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने रविवार को राज्य के संवेदनशील जिलों में ‘‘किसी के भी हताहत न होने’’ का लक्ष्य तय किया है। चक्रवात के प्रभाव से ओड़िशा के दक्षिण एवं तटीय क्षेत्रों में रविवार से बारिश शुरू हो गयी है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि मई में तबाही मचाने वाले ‘यास’ तूफान के बाद चार महीनों में राज्य में आया यह दूसरा तूफान है। इसके आधी रात के करीब गोपालपुर और आंध्र प्रदेश में कलिंगपत्तनम के बीच दस्तक देने की संभावना है।

विभाग ने बताया कि यह तूफान गोपालपुर से करीब 125 किलोमीटर दक्षिणपूर्व और कलिंगपत्तनम से 160 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। तूफान समुद्र में 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।

आईएमडी ने ‘रेड मैसेज’ (बहुत अधिक वर्षा का संदेश) जारी करते हुए कहा, ‘‘आज रात इसके पश्चिम की ओर बढ़ने तथा उत्तरी आंध्रप्रदेश एवं दक्षिण ओड़िशा तट को पार करने की संभावना है। इस दौरान 75-85 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक तूफान चल सकता है। रविवार देर शाम यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।’’

नयी दिल्ली से डिजिटल रूप से तैयारियों का जायजा लेते हुए पटनायक ने कहा कि सात चिह्नित जिलों गंजाम, गजपति, कंधमाल, कोरापुट, रायगढ़ा, नबरंगपुर और मलकानगिरी में प्रत्येक व्यक्ति की रक्षा के लिए सभी प्रयास किए जाएं। 11 जिलों के जिलाधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि चक्रवात का प्रक्षेप पथ एक ‘‘अपरंपरागत क्षेत्र’’ में स्थित है और अधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

राज्य के तटीय क्षेत्र में पहले कई चक्रवात आ चुके हैं लेकिन सात जिलों में लोगों के लिए ये प्राकृतिक घटनाएं नयी हैं।

विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) पी. के. जेना ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने लोगों से रविवार शाम से सोमवार को सुबह दस बजे तक घरों के भीतर रहने की अपील की है जब चक्रवात क्षेत्र से गुजरेगा।’’

उन्होंने अधिकारियों से शाम चार बजे तक लोगों को सुरक्षित निकालने का काम पूरा करने और भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील इलाकों, निचले क्षेत्रों और कच्चे मकानों से लोगों को निकालने के निर्देश दिए हैं क्योंकि चक्रवात से तेज हवाओं के साथ अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।

जेना ने कहा कि चक्रवात के रास्ते में आने वाले सभी शैक्षणिक संस्थान सोमवार को बंद रहेंगे।

ओड़िशा सरकार ने पहले ही बचाव एवं राहत कर्मियों एवं मशीनरी को तैयार कर लिया है एवं राज्य के दक्षिण हिस्से के सात चिह्नित जिलों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।

विशेष राहत आयुक्त पी. के. जेना ने बताया कि ओड़िशा आपदा त्वरित कार्यबल की 42 टीमों, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के 24 दस्तों तथा अग्निशमन कर्मियों की 102 टीमों को गजपति, गंजाम, रायगढ़ा, कोरापुट, मलकानगिरि, नबरंगपुर और कंधमाल जिलों में भेजा गया है।

जेना ने कहा कि गंजाम पर चक्रवात की सबसे अधिक मार पड़ने की आशंका है, इसलिए अकेले उस क्षेत्र में 15 बचाव दल भेजे गये हैं।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा अग्निशमन सेवा की 11 इकाइयों, ओड़िशा आपदा त्वरित कार्यबल के छह दलों तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के आठ दलों को आपात स्थिति के लिए तैयार रखा गया है।

जिले के एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि गंजाम जिले में समुद्र किनारे वाले गांवों में रह रहे लोगों को निकाला जा रहा है और दोपहर तक यह प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।

अगले तीन दिनों तक ओड़िशा, पश्चिम बंगाल एवं आंध्रप्रदेश से सटे समुद्र में बहुत खराब स्थिति रहेगी। ऐसे में मछुआरों को बंगाल की खाड़ी एवं अंडमान सागर में नहीं जाने की सलाह दी गई है।

उन्होंने बताया कि बीच समुद्र में फंसे कुछ मछुआरों को पारादीप में भारतीय तटरक्षक बल के कर्मियों ने बचाया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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