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मादक पदार्थ जब्ती मामले में आरोपी को जमानत

By भाषा | Updated: January 17, 2021 16:43 IST

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नयी दिल्ली, 17 जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रतिबंधित मादक पदार्थों की जब्ती के एक मामले में आरोपी व्यक्ति को जमानत देते हुए मोबाइल सर्विस प्रदाताओं को तीन वर्ष से भी अधिक पहले के कॉल डेटा रिकॉर्ड निकालने तथा मोबाइल नंबरों की लोकेशन का पता लगाने का निर्देश दिया। व्यक्ति के पास कथित तौर पर प्रतिबंधित मादक पदार्थ मिले थे जिसके बाद 2017 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने मामले में तथ्यों एवं परिस्थितियों पर विचार करने के बाद कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि घटनाक्रम में कुछ गड़बड़ है और व्यक्ति को इस मामले में फंसाया गया है।

न्यायमूर्ति ने कहा, ‘‘उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए मुझे ऐसा लगता है कि घटनाक्रम की पूरी कड़ी में कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है और इस मामले में याचिकाकर्ता को फंसाया गया है। हालांकि मामले के गुण दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना मेरा यह मानना है कि याचिकाकर्ता को जमानत मिलनी चाहिए।’’

आरोपी प्रदीप गुप्ता के लिए जमानत की मांग करते हुए उनके वकील ने कहा था कि पुलिस का एक दल उनके मुवक्किल को 11 अक्टूबर 2017 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से लेकर गया था और अगले दिन दिल्ली में उनके पास से मादक पदार्थों की कथित जब्ती दिखाकर उन्हें इस मामले में फंसा दिया गया।

आरोपी के वकील सुनील दलाल ने कहा कि गुप्ता ने पुलिस दल के दो फोन नंबर दिए थे जो यह दर्शाने के लिए थे कि दिल्ली में गिरफ्तारी से एक दिन पहले पुलिस दल के साथ वह अलीगढ़ में थे। इसके बाद सितंबर 2018 में निचली अदालत ने उन नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।

उन्होंने कहा कि निचली अदालत के आदेश के बारे में सेवा प्रदाताओं को सूचित नहीं किया गया ताकि यह तथ्य छिपाया जा सके कि प्राथमिकी दर्ज करने से एक दिन पहले ही गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया था।

दलाल ने कहा कि मोबाइल सेवा प्रदाता किसी भी मोबाइल नंबर की सीडीआर को केवल एक वर्ष तक ही सुरक्षित रखते हैं और इसके बाद अदालत के निर्देश के बाद ही इन्हें सुरक्षित रखवाया जा सकता है।

निचली अदालत ने वोडाफोन, एयरटेल, आइडिया, जियो और एमटीएनएल के नोडल अधिकारियों को उक्त मोबाइल नंबरों से संबंधित जानकारियों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। हालांकि वोडाफोन की ओर से पेश वकील ने कहा कि कंपनी को निचली अदालत के आदेश के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई इसलिए उन नंबरों से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय कहेगा तो वह इन जानकारियों को निकालने का प्रयास करेंगे लेकिन इसमें वक्त लगेगा।

इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि उक्त दो मोबाइल नंबर मार्च 2019 में ही बंद हो गए थे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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