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चौदह अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा : प्रधानमंत्री मोदी

By भाषा | Updated: August 14, 2021 17:52 IST

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नयी दिल्ली, 14 अगस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को घोषणा की कि 14 अगस्त को लोगों के संघर्षों एवं बलिदान की याद में अब 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। मोदी ने साथ ही कहा कि बंटवारे के दर्द को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।

मोदी ने कहा कि विभाजन के चलते सामने आयी नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’, ‘‘सामाजिक विभाजन, वैमनस्यता के जहर को दूर करे और एकता, सामाजिक सद्भाव और मानव सशक्तीकरण की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता की याद दिलाए।’’

वर्ष 1947 में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन द्वारा भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान का निर्माण एक मुस्लिम देश के रूप में किया गया था। उस दौरान लाखों लोग विस्थापित हुए थे तथा बड़े पैमाने पर दंगे भड़कने के कारण कई लाख लोगों की जान चली गई थी।

भारत रविवार को अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस आशय की घोषणा करने के कुछ घंटे बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर अधिसूचित किया।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ उन सभी लोगों के लिए एक उचित श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने राष्ट्र के विभाजन के कारण अपनी जान गंवाई और अपनी जड़ों से विस्थापित हो गए।

मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के दिवस की घोषणा से भारतीयों की वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को विभाजन के दौरान लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा और दर्द की याद आएगी।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा, ‘‘स्वतंत्रता दिवस किसी भी राष्ट्र के लिए एक खुशी और गर्व का अवसर होता है, जो हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है। हालांकि, स्वतंत्रता की मिठास के साथ विभाजन का आघात भी आया। नये स्वतंत्र भारतीय राष्ट्र का जन्म विभाजन की हिंसक पीड़ाओं के साथ हुआ था, जिसने लाखों भारतीयों पर जख्म के स्थायी निशान छोड़े।’’

मंत्रालय ने कहा कि विभाजन का दर्द और हिंसा देश की स्मृति में गहराई से अंकित है। ऐसे में जब देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए आगे बढ़ा है, देश के विभाजन के दर्द को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘हमारी स्वतंत्रता का जश्न मनाते हुए, एक कृतज्ञ राष्ट्र हमारी प्यारी मातृभूमि के उन बेटों और बेटियों को भी सलाम करता है, जिन्हें हिंसा के उन्माद में अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी थी।’’

उसने कहा कि विभाजन मानव इतिहास में सबसे बड़े पलायन में से एक का कारण बना और इसने लगभग दो करोड़ लोगों को प्रभावित किया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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