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CAB को लेकर सुलगा पूर्वोत्तर, गुवाहाटी में कर्फ्यू, त्रिपुरा में सेना बुलाई, CM सोनोवाल के घर पर पथराव, दो रेलवे स्टेशन को किया आग के हवाले

By भाषा | Updated: December 12, 2019 05:56 IST

नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोधः शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच असम के 10 जिलों में बुधवार की शाम सात बजे से 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। डिब्रूगढ़ में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगाया गया, वहीं जोरहाट में सेना बुलाई गई।

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ठळक मुद्देनागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच असम के गुवाहाटी में बुधवार को अनिश्चिकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया।त्रिपुरा में सेना बुलाई गई है और असम में सेना की टुकड़ी को तैयार रहने को कहा गया है।

नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच असम के गुवाहाटी में बुधवार को अनिश्चिकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया, जबकि त्रिपुरा में सेना बुलाई गई है और असम में सेना की टुकड़ी को तैयार रहने को कहा गया है। इस बीच संसद ने विधेयक पारित होने के बाद असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के डिब्रूगढ़ स्थित आवास पर बुधवार की रात पथराव किया गया। डिब्रूगढ़ के उपायुक्त पल्लव गोपाल झा ने कहा कि मुख्यमंत्री के लखीनगर इलाके में बने घर पर पत्थर फेंके गए।घर के एक रखवाले ने बताया कि पथराव में कुछ खिड़कियां टूट गईं। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक गौतम बोरा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने भाजपा विधायक प्रशांत फुकान और पार्टी नेता सुभाष दत्ता के घरों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे पहले दोपहर में प्रदर्शनों के चलते सोनोवाल गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर कुछ समय के लिए फंस गए थे। इसके अलावा अधिकारियों ने बताया कि डिब्रूगढ़ में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगाया गया, वहीं जोरहाट में सेना बुलाई गई। प्रदर्शनकारियों ने असम में चबुआ और पानीटोला रेलवे स्टेशन को आग के हवाले किया, जिसके बाद रेवले स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ाई गई।  

शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच असम के 10 जिलों में बुधवार की शाम सात बजे से 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। राज्य सरकार के अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि शांति भंग करने के लिए सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने और कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने के लिए इंटरनेट सेवाओं को स्थगित रखा जायेगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह और राजनीतिक विभाग) कुमार संजय कृष्णा द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार लखीमपुर, धेमाजी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, कामरूप (मेट्रो) और कामरूप में इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। शरारती तत्वों के शांति को भंग करने के प्रयासों को विफल करने के लिए पूरे त्रिपुरा राज्य में भी मंगलवार की अपराह्र दो बजे से 48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं पहले से ही बंद हैं। त्रिपुरा में इंटरनेट सेवाएं बुधवार को दूसरे दिन भी बंद रहीं। अधिकारियों ने बताया कि इंटरनेट सेवाएं बृहस्पतिवार तक स्थगित रहेंगी।

उन्होंने बताया कि ट्रेन और बस सेवाएं भी रोकी गई हैं। शुरूआत में असम के पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने बताया था कि कर्फ्यू बृहस्पतिवार की सुबह सात बजे तक प्रभावी रहेगा। हालांकि उन्होंने बाद में बताया कि कर्फ्यू अनिश्चिकाल के लिए बढ़ा दिया गया है। शिलांग में सेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि त्रिपुरा में बुधवार को सेना बुला ली गई और असम में सेना की टुकड़ियों को आज रात ही तैनात कर दिया गया। प्रवक्ता ने बताया कि सेना की एक-एक टुकड़ी को त्रिपुरा के कंचनपुर और मनु में तैनात किया गया है।

नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी असम की सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई और इससे राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है। हालांकि किसी पार्टी या छात्र संगठन ने बंद का आह्वान नहीं किया है। प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर छात्र शामिल हैं जिनकी सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

कुछ छात्र नेताओं ने दावा किया कि सचिवालय के सामने पुलिस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गये। गैर आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ तथा जोरहाट जैसे अन्य स्थानों पर कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। इसी तरह की घटनाएं त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से भी सामने आई है।

कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के अखिल गोगोई ने इस विवादास्पद विधेयक के खिलाफ ‘हड़ताल’ का आह्वान किया है। गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालयों ने सभी परीक्षाओं को 14 दिसम्बर तक के लिए स्थगित कर दिया। नागरिकता संशोधन विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थी - हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है। 

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