Asia Cup compound archers: 2 स्वर्ण, 4 रजत और 4 कांस्य पदक?, एशिया कप विश्व रैंकिंग टूर्नामेंट में भारत ने किया क्लीन स्वीप?
By सतीश कुमार सिंह | Updated: March 27, 2026 16:05 IST2026-03-27T16:05:47+5:302026-03-27T16:05:57+5:30
एशिया कप-विश्व रैंकिंग टूर्नामेंट के पहले चरण में भारतीय कंपाउंड तीरंदाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मिश्रित टीम में स्वर्ण और महिला टीम में रजत पदक जीता।

सांकेतिक फोटो
बैंकॉक: भारत के कंपाउंड तीरंदाजों ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए शुक्रवार को यहां एशिया कप विश्व रैंकिंग टूर्नामेंट के पहले चरण में मिश्रित टीम का स्वर्ण पदक और महिला टीम का रजत पदक जीता और पुरुषों के व्यक्तिगत वर्ग में क्लीन स्वीप किया। भारत ने दोपहर के सत्र में रिकर्व वर्ग में दो रजत पदक भी जीते। इस तरह से उसने इस प्रतियोगिता में दो स्वर्ण, चार रजत और चार कांस्य पदक जीते। भारत ने कुल 10 पदक हासिल किए जो पिछली बार के आठ पदक से अधिक है। भारत ने हालांकि पिछली बार पांच स्वर्ण पदक जीते थे। रिकर्व वर्ग में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन में छिपा है।
कोई भी तीरंदाज स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर सका, जबकि पुरुष व्यक्तिगत वर्ग और मिश्रित टीम स्पर्धा में भी भारत को कोई पदक नहीं मिला। 2025 में, भारत ने पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण और रजत पदक जीता था, जबकि मिश्रित टीम ने रजत पदक अपने नाम किया था। पुरुष कंपाउंड व्यक्तिगत वर्ग में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा रहा।
उदय कंबोज ने रोमांचक फाइनल में प्रथमेश जवकार को 145-144 से हराकर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता, वहीं अनुभवी खिलाड़ी रजत चौहान ने कांस्य पदक हासिल किया। शांत स्वभाव वाले चौहान ने अंतिम एंड में अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल करते हुए तीन सटीक तीर चलाकर स्थानीय खिलाड़ी पीरावत रतनपोंगकियात को 145-144 से हराकर भारतीय दबदबे को और मजबूत किया।
31 वर्षीय पूर्व विश्व चैंपियनशिप रजत पदक विजेता तीन एंड के बाद दो अंकों से पीछे थे। चौहान ने चौथे एंड में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए सिर्फ एक अंक गंवाया, जबकि पीरावत 27 अंक बनाकर पिछड़ गए और उन्होंने '8-रिंग' में निशाना साधा।
अंतिम एंड में 115-115 के स्कोर पर बराबरी पर चल रहे चौहान ने तीन सटीक 10 अंक लगाकर मैच को एक अंक से अपने नाम कर लिया और भारत को चौथा कांस्य पदक दिलाया। इसके साथ ही इस स्पर्धा में देश के तीरंदाजों की क्लीन स्वीप भी सुनिश्चित हो गई, क्योंकि अगले मैच में दोनों टीमों का फाइनल मुकाबला पूरी तरह से भारतीय था।