राज्यसभा सदस्य के रूप में 10 अप्रैल को शपथ लेने की तारीख हुई तय, नीतीश कुमार, नितिन नबीन समेत सभी लोग लेंगे शपथ
By एस पी सिन्हा | Updated: March 28, 2026 17:23 IST2026-03-28T17:23:09+5:302026-03-28T17:23:09+5:30
राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य शिवेश राम को राज्यसभा के रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए फोन आया है। ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत बिहार के सभी पांच निर्वाचित सदस्य 10 अप्रैल को शपथ लेंगे।

राज्यसभा सदस्य के रूप में 10 अप्रैल को शपथ लेने की तारीख हुई तय, नीतीश कुमार, नितिन नबीन समेत सभी लोग लेंगे शपथ
पटना: बिहार से राज्यसभा के पांच सीटों के लिए हाल ही में संपन्न हुआ चुनाव में नव निर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण की तारीख तय हो गई है। 10 अप्रैल को राज्यसभा में नए निर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। राज्यसभा के लिए चुने गए सदस्य इस दिन विधिवत शपथ लेंगे। राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य शिवेश राम को राज्यसभा के रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए फोन आया है। ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत बिहार के सभी पांच निर्वाचित सदस्य 10 अप्रैल को शपथ लेंगे।
बता दें कि बिहार की खाली हो रही सभी पांच सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की जीत हुई थी। जदयू से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और शिवेश कुमार ने जीत हासिल की थी। जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी राज्यसभा सदस्य के तौर पर निर्वाचित हुए थे।
चुनावी प्रक्रिया खत्म होने के बाद शपथ ग्रहण का इंतजार हो रहा था। अब राज्यसभा ने देशभर के 37 नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण की तारीश तय कर दी है। आगामी 10 अप्रैल को सभी सदस्यों का शपथ ग्रहण कराया जाएगा। इसको लेकर नवनिर्वाचित सदस्यों के पास राज्यसभा की तरफ से फोन आने भी शुरू हो गए हैं।
बिहार से नीतीश कुमार के साथ साथ सभी पांच सदस्य इस दिन राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इस बीच बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने को लेकर पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नीतीश कुमार के जाने से पूरे बिहार को उनकी कमी खलेगी।
उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी और जनता का एक बड़ा वर्ग नहीं चाहता था कि वे राज्य की सक्रिय राजनीति से दूर जाएं, लेकिन परिस्थितियों के कारण यह फैसला लेना पड़ा। अशोक चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि बिहार के विकास की पहचान बन चुके हैं। उनके काम करने के तरीके और प्रशासनिक क्षमता का असर पूरे राज्य पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें करीब से जानते हैं, वे समझते हैं कि उन्होंने बिहार को किस तरह बदला है। ऐसे में उनका राज्यसभा जाना कई लोगों के लिए भावनात्मक क्षण है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में सक्रिय होने को लेकर उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि निशांत पार्टी और लोगों को समझने के लिए बैठकों में भाग ले रहे हैं। जितना ज्यादा वे कार्यकर्ताओं और जनता के संपर्क में आएंगे, उतना ही बेहतर होगा।
निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग और पोस्टर-बैनर लगाए जाने के सवाल पर अशोक चौधरी ने कहा कि कार्यकर्ताओं की अपनी भावनाएं होती हैं। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि जब ऐसे लोग भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखते हैं जो मैट्रिक पास नहीं हैं, तो एक इंजीनियरिंग पढ़े-लिखे व्यक्ति को मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए? उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं का एक वर्ग चाहता है कि निशांत कुमार आगे बढ़ें और उन्हें भी मौका दिया जाए।