विजयन ने न्यायालय के फैसले की सराहना करते हुए कहा, अगले पांच साल में राज्य में गरीबी खत्म करेंगे

By भाषा | Updated: July 28, 2021 15:48 IST2021-07-28T15:48:28+5:302021-07-28T15:48:28+5:30

Appreciating the decision of the court, Vijayan said, in the next five years, we will end poverty in the state. | विजयन ने न्यायालय के फैसले की सराहना करते हुए कहा, अगले पांच साल में राज्य में गरीबी खत्म करेंगे

विजयन ने न्यायालय के फैसले की सराहना करते हुए कहा, अगले पांच साल में राज्य में गरीबी खत्म करेंगे

तिरुवनंतपुरम, 28 जुलाई केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय के उस फैसले की सराहना की, जिसमें अदालत ने कहा था कि गरीबी के जड़ से मिटने तक भीख मांगने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में अत्यधिक गरीबी को खत्म करना है।

उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि कोई भीख नहीं मांगना चाहता लेकिन गरीबी और भूख उन्हें ऐसा करने को मजबूर कर देती है। शीर्ष अदालत का फैसला एक प्रमुख सामाजिक-आर्थिक मुद्दे के प्रासंगिक मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है।

यह उल्लेख करते हुए कि गरीबी और भीख मांगना, इसके परिणामों में से एक और उसे प्रतिबंध से नहीं मिटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस तरह के दृष्टिकोण को बदला जाना चाहिए और समाज में गरीब लोगों के प्रति ‘‘ सहानुभूति और मदद करने की इच्छा’’ होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बिना भीख के संसार तभी संभव है जब असहाय लोगों को सहारा दिया जाए और उन्हें गरीबी से मुक्त किया जाए। यह आसान काम नहीं है।

विजयन ने कहा कि शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले पर देश में नीति बने और इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए केरल सरकार ने अत्यधिक गरीबी को मिटाने के लिए एक नई परियोजना शुरू की है। इस संबंध में एक सर्वेक्षण किया जा रहा है, जो चार महीने में पूरा हो जाएगा। केरल का लक्ष्य अगले पांच साल में अत्यधिक गरीबी को दूर करना है। आइए सब मिलकर इस लक्ष्य को हासिल करें।’’

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कोविड-19 महामारी के मद्देनजर भिखारियों तथा बेसहारा लोगों के पुनर्वास और टीकाकरण के लिए दायर याचिका पर मंगलवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था।

शीर्ष अदालत ने साफ किया कि सड़कों पर भिखारियों को नहीं आने की इजाजत देने के मामले में वह ‘‘अभिजात्‍यवादी नजरिया’’ नहीं अपनाएगा। न्यायालय ने कहा कि भिक्षावृत्ति एक सामाजिक-राजनीतिक समस्या है और शिक्षा और रोजगार की कमी के कारण आजीविका की कुछ बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग पर सड़कों पर भीख मांगने पर मजबूर होते हैं।

अदालत ने कहा था, ‘‘ यह गरीबी की सामाजिक-आर्थिक समस्या है। उनका पुनर्वास किया जाए, उन्हें और उनके बच्चों को शिक्षा दी जाए। ऐसा लोगों के पास कोई विकल्प नहीं होता है और कोई भी भीख मांगना नहीं चाहता है।

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Web Title: Appreciating the decision of the court, Vijayan said, in the next five years, we will end poverty in the state.

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