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अवमानना नोटिस के खिलाफ केंद्र की याचिका पर सुनवाई को सहमत शीर्ष अदालत

By भाषा | Updated: May 5, 2021 15:27 IST

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नयी दिल्ली, पांच मई उच्चतम न्यायालय राजधानी में ऑक्सीजन की आपूर्ति के आदेश के अनुपालन में कोताही के कारण दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जारी अवमानना नोटिस के खिलाफ दायर केन्द्र सरकार की याचिका पर बुधवार को सुनवाई के लिये सहमत हो गया।

इस याचिका में उच्च न्यायालय द्वारा केंद्र के अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश को भी चुनौती दी गई है।

उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि कोविड-19 मरीजों के उपचार के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति के बारे में उसके आदेश का अनुपालन करने में विफल रहने पर उसके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों नहीं की जाए।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता यह मामला प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उठाया क्योंकि देश में कोविड-19 प्रबंधन पर स्वतं: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ बुधवार को उपलब्ध नहीं थी।

मेहता ने कहा, “मैंने इस मामले का उल्लेख मामले सूचीबद्ध करने वाले रजिस्ट्रार के समक्ष किया था। इसमें कुछ अत्यावश्यक है। इसे आज ही सुने जाने की जरूरत है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑक्सीजन मुद्दे के संबंध में कल आदेश पारित किया था। उच्च न्यायालय ने....केंद्र सरकार के अधिकारियों से अवमानना के लिए व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहने को कहा था।”

प्रधान न्यायाधीश नीत पीठ ने कहा, “हम क्या कर सकते हैं” और मामले की तत्कालिकता के बारे में दोबारा बताए जाने पर पीठ ने कहा कि इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी।

शीर्ष अदालत ने 30 अप्रैल को पारित आदेश में केंद्र को दिल्ली में तीन मई की मध्यरात्रि तक ऑक्सीजन की कमी संबंधी स्थिति को दुरुस्त करने का निर्देश दिया था और इसका अनुपालन नहीं करने पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को मंगलवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

उच्च न्यायालय ने कहा था, “इसलिए हम, केंद्र सरकार को कारण बताने का निर्देश देते हैं कि हमारे मई के और उच्चतम न्यायालय के 30 अप्रैल के आदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए अवमाना की कार्रवाई क्यों न की जाए। उक्त नोटिस का जवाब देने के लिए, हम पीयूष गोयल और सुमित्रा दावरा (केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी) की कल मौजूदगी का निर्देश देते हैं।”

अदालत ने कहा, “आप शुतुरमुर्ग की तरह रेत में अपना सिर छिपा सकते हैं, हम नहीं।” साथ ही कहा उच्चतम न्यायालय पहले ही निर्देश दे चुका है कि केंद्र को किसी भी तरीके से दिल्ली को रोजाना 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन रोजाना उपलब्ध करानी होगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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