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कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान घर-घर ले जाना होगा: प्रधानमंत्री मोदी

By भाषा | Updated: November 3, 2021 18:35 IST

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नयी दिल्ली, तीन नवंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीकाकरण का दायरा बढ़ाने के लिए अभिनव तरीके अपनाने और दूसरी खुराक लेकर टीकाकरण अभियान को पूर्णता प्रदान करने के महत्व पर जोर दिया।

एक अरब वैक्सीन खुराक के मील के पत्थर को पार करने के बाद किसी भी ढिलाई के खिलाफ आगाह करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘एक नया संकट आ सकता है।’’ उन्होंने एक कहावत का हवाला देते हुए कहा कि किसी को बीमारियों और दुश्मनों को कम नहीं आंकना चाहिए, और उनके खिलाफ अंत तक लड़ना चाहिए।

उन्होंने कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने पर भी समान रूप से ध्यान देने का आह्वान किया। साथ ही, यह भी कहा कि जब भी संक्रमण के मामले कम होने लगते हैं तो लोगों में अनिवार्यता की भावना कम हो जाती है।

मोदी ने यह टिप्पणी झारखंड, मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय और कम टीकाकरण वाले 40 से अधिक जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान की।

उन्होंने कोविड टीकाकरण के बारे में अफवाहों और गलतफहमी के मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि जागरूकता ही इसका एकमात्र समाधान है और राज्य के अधिकारियों से इस संबंध में धार्मिक नेताओं से मदद लेने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि धार्मिक नेता टीकाकरण अभियान को लेकर बहुत उत्साहित हैं।

प्रधानमंत्री ने इटली की अपनी हालिया यात्रा के दौरान वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस से मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि टीकों के बारे में धार्मिक नेताओं के संदेश को जनता तक ले जाने की विशेष आवश्यकता है।’’

मोदी ने जिलों के अधिकारियों से कहा, ‘‘अब तक आप, लोगों को टीकाकरण केंद्रों तक ले जाने के लिए काम कर रहे थे, अब समय आ गया है कि टीका घर-घर पहुंचाया जाए और ‘हर घर दस्तक’ अभियान के साथ काम किया जाए। अब तक जिन्हें टीका नहीं लगा है उन्हें इसकी पहली खुराक सुनिश्चित करें लेकिन दूसरी खुराक देने पर भी उतना ही ध्यान दें।’’

प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि घर-घर पहुंचकर वैक्सीन की पहली खुराक के साथ-साथ दूसरी खुराक पर भी बराबर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘आपको उन लोगों से संपर्क करना होगा जिन्होंने प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय के बावजूद दूसरी खुराक नहीं ली है..इसकी अनदेखी ने दुनिया के कई देशों के लिए समस्याएं पैदा कर दी हैं।’’

उन्होंने कहा कि दिवाली एक अरब खुराक देने के महत्वपूर्ण मील के पत्थर के बाद मनाई जा रही है और लोगों को इस संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए कि वे नये लक्ष्यों को प्राप्त करने के बाद क्रिसमस मनाएंगे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में उन जिलों के अधिकारी शामिल हुए जहां पर 50 फीसदी से भी कम पात्र लाभार्थियों को टीके की पहली खुराक मिली है और दूसरी खुराक लगवाने वाले लोगों की संख्या भी जहां पर कम है।

बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने जी-20 और सीओपी-26 बैठकों में शामिल होकर विदेश से लौटने के तुरंत बाद यह बैठक की।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि बैठक के दौरान, जिलाधिकारियों ने अपने जिलों में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का लेखा-जोखा दिया, जिसके परिणामस्वरूप कम टीकाकरण हुआ है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने अफवाहों के कारण टीके लगाने में हिचकिचाहट, दुर्गम इलाके, हाल के महीनों में मौजूदा मौसम की स्थिति के कारण पैदा हुई चुनौतियों जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला।

अधिकारियों ने इन चुनौतियों को दूर करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों का विवरण भी प्रस्तुत किया और उनके द्वारा अपनाई गई अच्छी प्रथाओं को भी साझा किया जिससे कवरेज में वृद्धि हुई है।

उन्होंने इन जिलों में शत-प्रतिशत टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित करने के लिए लागू किए जा सकने वाले विचारों की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की।

बयान में कहा गया है कि मोदी ने धार्मिक और सामुदायिक नेताओं के माध्यम से सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ाने की बात कही। उन्होंने सभी अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि देश वर्ष के अंत तक अपने टीकाकरण कवरेज का विस्तार करे और नए साल में नए आत्मविश्वास के साथ प्रवेश करे।

बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने देश में टीकाकरण कवरेज और राज्यों में शेष वैक्सीन खुराक की उपलब्धता का लेखा-जोखा दिया।

अधिकारी ने टीकाकरण कवरेज को और बेहतर बनाने के लिए राज्यों में चलाए जा रहे विशेष टीकाकरण अभियानों के बारे में भी बात की।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वर्तमान मुख्यमंत्रियों को धन्यवाद दिया।

मोदी ने कहा कि सदी की इस सबसे बड़ी महामारी में देश ने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन साथ ही कहा कि ‘कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई में एक खास बात यह थी कि हमने नए समाधान ढूंढे और नए तरीके आजमाए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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