कीमत 3,716 करोड़ रुपये और 17 मंजिला?, अनिल अंबानी के मुंबई घर 'एबोड' कुर्क, ईडी एक्शन
By सतीश कुमार सिंह | Updated: February 25, 2026 18:32 IST2026-02-25T18:26:10+5:302026-02-25T18:32:25+5:30
बुधवार को आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी के मुंबई स्थित 3,716 करोड़ रुपये के घर को मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून के तहत जब्त कर लिया है।

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मुंबईः प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन रोधक कानून (पीएमएलए) के तहत रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी के मुंबई स्थित घर ‘एबोड’ को कुर्क कर लिया है, जिसकी कीमत 3,716 करोड़ रुपये है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। मुंबई के पाली हिल इलाके में स्थित 66 मीटर ऊंचा यह आलीशान घर 17 मंजिला है।
सूत्रों के अनुसार, उनकी समूह कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) द्वारा कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इस बहुमंजिला घर को जब्त करने का अंतरिम आदेश जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि जब्त की गई संपत्ति का मूल्य 3,716.83 करोड़ रुपये है।
ईडी के अनुसार, अनिल अंबानी और उनकी समूह कंपनियों के खिलाफ अब तक की गई कुल कुर्की कार्रवाई 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस महीने की शुरुआत में ईडी को रिलायंस कम्युनिकेशंस, कंपनियों और रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश के बाद हुई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने अंबानी के वकील मुकुल रोहतगी के उस आश्वासन पर भी प्रकाश डाला, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके मुवक्किल देश छोड़कर नहीं जाएंगे और जांच में किसी भी तरह की बाधा न डालने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को उन सभी बैंक अधिकारियों की पहचान करने का निर्देश दिया है।
कथित धोखाधड़ी में संलिप्त हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों एजेंसियां अपनी जांच में सुस्ती बरत रही हैं और अब उनसे निष्पक्ष जांच की अपेक्षा करता है। अदालत ने सीबीआई और ईडी को इस मामले में अपनी जांच की प्रगति के बारे में समय-समय पर सूचित करने का निर्देश दिया है।
ईडी ने पिछले साल सीबीआई की उस एफआईआर के बाद इस मामले की जांच शुरू की थी जिसमें अनिल अंबानी, आरकॉम और अन्य पर धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। जांच का केंद्र आरकॉम और उसकी सहयोगी कंपनियां हैं, जिन्होंने 2010 से 2012 के बीच भारतीय और विदेशी बैंकों से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लिया था।
इनमें से पांच खातों को ऋण देने वाले बैंकों ने धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया है। सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसबीआई की शिकायत पर पहली बार एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई थी, और इसका दायरा बढ़ाकर बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया जैसे अन्य बैंकों की इसी तरह की शिकायतों को भी इसमें शामिल किया गया।