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लोकसभा में अमित शाह ने पेश किया नागरिकता संशोधन विधेयक, जानें बिल की खास बातें

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 9, 2019 12:29 IST

यह बिल नागरिकता बिल 1955 में संशोधन करता है, जिससे चुनिंदा श्रेणियों में अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का पात्र बनाया जा सके।

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ठळक मुद्देसूत्रों के अनुसार इस विवादास्पद विधेयक को अगले सप्ताह निचले सदन में पेश किया जा सकता है। विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर राज्यों में पहले व्यापक प्रदर्शन हो चुके हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार (9 दिसंबर) को लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पेश कर दिया है। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। 

लोकसभा में सोमवार को होने वाले कार्यों की सूची के मुताबिक गृह मंत्री विधेयक पेश किया जिसमें छह दशक पुराने नागरिकता कानून में संशोधन की बात है और इसके बाद इस पर चर्चा होगी और इसे पारित कराया जाएगा। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी थी। हालांकि कई विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को लोकसभा में अगले सप्ताह के प्रस्तावित विधेयकों में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 का भी उल्लेख किया। 

सूत्रों के अनुसार इस विवादास्पद विधेयक को अगले सप्ताह निचले सदन में पेश किया जा सकता है। हालांकि नया कानून असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय , मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में लागू नहीं होगा। विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर राज्यों में पहले व्यापक प्रदर्शन हो चुके हैं।

क्या है नागरिकता संशोधन बिल (सीएबी)? 

-यह बिल नागरिकता बिल 1955 में संशोधन करता है, जिससे चुनिंदा श्रेणियों में अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का पात्र बनाया जा सके

-नागरिकता संशोधन बिल का उद्देश्य बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आने वाले छह समुदायों-हिंदू, सिख, जैन बौद्ध, ईसाई और पारसी धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता देना है। 

-इस बिल में इन छह समुदायों को ऐसे लोगों को भी नागरिकता देने का प्रस्ताव है, जो  वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना ही भारत आए गए थे या जिनके दस्तावेजों की समय सीमा समाप्त हो गई है।  

-अगर कोई व्यक्ति, इन तीन देशों से के उपरोक्त धर्मों से संबंधित है, और उसके पास अपने माता-पिता के जन्म का प्रमाण नहीं है, तो वे भारत में छह साल निवास के बाद भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

टॅग्स :अमित शाहनागरिकता (संशोधन) विधेयक
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