अमित शाह और ललन सिंह रवाना हुए एक ही विमान से, हुई होगी आगे की रणनीति पर चर्चा, अटकलों का बाजार गरम
By एस पी सिन्हा | Updated: March 5, 2026 17:26 IST2026-03-05T17:26:45+5:302026-03-05T17:26:51+5:30
इससे पहले पटना में अमित शाह की मौजूदगी में नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। दोनों नेताओं की एक साथ दिल्ली यात्रा को बिहार की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है।

अमित शाह और ललन सिंह रवाना हुए एक ही विमान से, हुई होगी आगे की रणनीति पर चर्चा, अटकलों का बाजार गरम
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन में शामिल होने आए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री तथा जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह गुरुवार को एक साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गए। इससे पहले पटना में अमित शाह की मौजूदगी में नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। दोनों नेताओं की एक साथ दिल्ली यात्रा को बिहार की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल ललन सिंह को नीतीश कुमार का करीबी सहयोगी माना जाता है। ऐसे में जदयू और भाजपा के बीच अगली सरकार के गठन को लेकर संभावित समझौते को अंतिम रूप देने में यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, शाह और ललन में बिहार के अगले मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे, उप मुख्यमंत्रियों की संख्या और नाम, साथ ही राज्यसभा जाने के बाद नीतीश कुमार की भूमिका जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
बिहार में सत्ता परिवर्तन अब कुछ समय की बात रह गई है ऐसे में दोनों नेताओं का एक साथ का यह दौरा कई संकेत दे रहा है। एक प्रकार से दोनों की इस यात्रा में कई गोपनीय बातें हुई होंगी, जिसमें सिर्फ यही दोनों आगे की सभी बातों को तय करेंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना स्थित विधानमंडल परिसर में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। इस दौरान जदयू और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
समर्थकों का कहना है कि उनका अनुभव अब राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग में लाया जाएगा। नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर विधानसभा, लोकसभा और विधान परिषद तक फैला रहा है। अब राज्यसभा के लिए नामांकन को उनके सार्वजनिक जीवन के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके उच्च सदन में जाने से बिहार में नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं और भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो सकता है।