बिहार में सत्ता परिवर्तन की संभावना के बीच संभावित मुख्यमंत्री के नामों को लेकर कयासों का बाजार हुआ गरम, भाजपा में संघ बैकग्राउंड हो सकता है अहम
By एस पी सिन्हा | Updated: March 6, 2026 17:10 IST2026-03-06T17:10:32+5:302026-03-06T17:10:32+5:30
सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार अपने राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों से विस्तार से बातचीत करेंगे और उनकी राय भी जानेंगे। सूत्रों के अनुसार फिलहाल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। जब तक वे औपचारिक रूप से राज्यसभा सांसद नहीं बन जाते, तब तक बिहार सरकार की कमान उनके हाथों में ही रहेगी।

बिहार में सत्ता परिवर्तन की संभावना के बीच संभावित मुख्यमंत्री के नामों को लेकर कयासों का बाजार हुआ गरम, भाजपा में संघ बैकग्राउंड हो सकता है अहम
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है। इसी को लेकर अब जदयू संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर नई रणनीति बनाने में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार अपने राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों से विस्तार से बातचीत करेंगे और उनकी राय भी जानेंगे। सूत्रों के अनुसार फिलहाल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे। जब तक वे औपचारिक रूप से राज्यसभा सांसद नहीं बन जाते, तब तक बिहार सरकार की कमान उनके हाथों में ही रहेगी।
सियासी गलियारे में चल रही चर्चा के अनुसार मुख्यमंत्री भाजपा के कोटे से अगर होता है तो उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम लिया जा रहा है। वे फिलहाल राज्य सरकार में दूसरे नंबर की स्थिति रखते हैं और उनके पास गृह विभाग की जिम्मेदारी भी है। हालांकि वह भाजपा में आयातित नेता के तौर पर जाने जाते हैं और बैकग्राउंड भी संघ का नहीं रहा है। इसके अलावे वह विवादों के घेरे में भी रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने तो उनके इतिहास का पुरा पुलिंदा हीं खोलकर रख दिया था। एक और प्रमुख नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का भी लिया जा रहा है। यादव बिरादरी से आने वाले नित्यानंद राय को अगर बिहार की कमान सौंपी जाती है तो इससे यादव मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित करने की रणनीति को बल मिल सकता है।
वहीं, मुख्यमंत्री पद के लिए विजय कुमार सिन्हा का भी नाम सामने आ रहा है। अगड़ी जाति(भूमिहार) से आने वाले विजय कुमार सिन्हा की नजदीकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रही है और संगठन के भीतर भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पार्टी इनके नाम पर भी विचार कर सकती है। भाजपा के संभावित चेहरों में एक नाम नीतीश मिश्रा का भी चर्चा में है। वे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे हैं और पिछली सरकार में उद्योग मंत्री रह चुके है। नई सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिलने के बाद उनके नाम को लेकर अटकलें और तेज हो गई है। महिला चेहरे की बात करें तो खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का नाम भी संभावितों में लिया जा रहा है। वे युवा हैं और खेल की दुनिया में भी चर्चित हैं। अगर उनके नाम पर सहमति बनी तो बिहार को एक युवा, पढ़ी-लिखी और स्वच्छ छवि वाली महिला मुख्यमंत्री मिल सकती है।
वहीं, सीतामढ़ी जिले से आने वाली विधायक गायत्री देवी का नाम भी चर्चा में है। वे लगातार तीसरी बार भाजपा के टिकट पर विधायक बनी हैं। हालांकि भाजपा के द्वारा लिए जाने वाले फैसले अक्सर चौंकाने वाले होते हैं। इसके साथ हीं दीघा से भाजपा विधायक संजीव चौरसिया के नाम को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में तत्काल इसपर किसी प्रकार का दावा नहीं किया जा सकता है।
इसके अलावा जदयू की ओर से अगर कोई मुख्यमंत्री बनता है तो ऐसी स्थिति में जदयू वरिष्ठ नेता एवं मंत्री विजय कुमार चौधरी का नाम लिया जा रहा है। विजय कुमार चौधरी कई विभागों के मंत्री रहने के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं। जदयू खेमे में एक और प्रमुख नाम मंत्री श्रवण कुमार का भी लिया जा रहा है। नालंदा जिले से आने वाले श्रवण कुमार लगातार चुनाव जीतते रहे हैं और उन्हें भी मुख्यमंत्री का करीबी माना जाता है। इस बीच राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि जदयू की ओर से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फैसला भी लिया जा सकता है।
माना जा रहा है कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच पार्टी सत्ता में अपनी हिस्सेदारी को और मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक नया प्रयोग माना जाएगा। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का उपमुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावे बिहार में जदयू का नेतृत्व भी उन्हें सौंपा जा सकता है।